वॉलमार्ट के स्वामित्व वाली ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट ने आंतरिक रूप से अपने आईपीओ का मूल्यांकन लक्ष्य बढ़ाकर करीब 60 अरब डॉलर कर दिया है और इस निर्गम की जानकारी रखने वाले लोगों कहना है कि अब कंपनी इस साल के बजाय 2023 में अमेरिकी सूचीबद्घता चाहती है। यह भारत में कंज्यूमर टेक स्पेस में सबसे बड़ा आईपीओ होगा।
भारत में उभरते ई-कॉमर्स बाजार का तेजी से लाभ उठाने के लिए एमेजॉन, रिलायंस के जियोमार्ट और टाटा समेत कंपनियों समेत विभिन्न प्रतिस्पर्धियों की सूची में शामिल कंपनी ने शुरू में अपने आईपीओ का मूल्यांकन लक्ष्य 50 अरब डॉलर पर तय किया था। कंपनी नए लक्ष्य पर नजर लगाए हुए है, क्योंकि कोविड-19 महामारी से ई-कॉमर्स की दिशा में तेजी से बदलाव आया है और ज्यादा संख्या में उपभोक्ता फ्लिपकार्ट प्लेटफॉर्म पर बार बार ऑनलाइन खरीदारी कर रहे हैं। भारत में ऑनलाइन रिटेल बाजार मौजूदा 45-50 अरब डॉलर से बढ़कर वर्ष 2030 तक 350 अरब डॉलर तक पहुंच जाने की संभावना है।
फ्लिपकार्ट की आईपीओ योजनाओं के बारे में जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने कहा, ‘पिछले साल कोष उगाही के बाद से, फ्लिपकार्ट में व्यवसाय कोविड-19 और विक्रेताओं तथा उपभोक्ताओं के बीच डिजिटल संबंधित आए व्यापक बदलाव की वजह से सालाना आधार पर 50 प्रतिशत की दर से बढ़ा। कंपनी में आईपीओ मूल्यांकन 50 अरब डॉलर से बढ़ाकर 60 अरब डॉलर किए जाने को लेकर आंतरिक तौर पर चर्चाएं चल रही हैं और शायद अगले साल तक संभव हो जाएगा।’
पिछले साल, फ्लिपकार्ट समूह ने 3.6 अरब डॉलर जुटाकर वैश्विक सूची में स्वयं के लिए खास पहचान बनाई, जिसमें सॉफ्टबैंक से निवेश भी शामिल था, जो इस कंपनी से बाहर हो गई थी।
पिछले साल नवंबर में, फ्लिपकार्ट, एमेजॉन जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों ने करीब 9.2 अरब डॉलर की शानदार त्योहारी बिक्री सीजन दर्ज किया, जो 2019 के त्योहारी महीने के दौरान 5 अरब डॉलर के महामारी-पूर्व बिक्री आंकड़े से ज्यादा है। जैसा कि पिछले पांच वर्षों में देखने को मिला है, भारत में ऑनलाइन बिक्री लगातार तेज रफ्तार से बढ़ी है और कंसल्टिंग फर्म रेडसीर के अनुसार जीएमवी में सालाना आधार पर 23 प्रतिशत की वृद्घि दर्ज की गई।
देश में 35 करोड़ से ज्यादा पंजीकृत उपयोगकर्ताओं के साथ फ्लिपकार्ट ने कई प्रमुख श्रेणियों में निवेश किया है, जिनमें फैशन, ट्रैवल और ग्रोसरी मुख्य रूप से शामिल हैं। ये श्रेणियां कंपनी की वृद्घि में अहम योगदान दे रही हैं।