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चीन की खेप रुकने से इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों को झटका

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Last Updated- December 15, 2022 | 7:59 AM IST

भारत और चीन में बंदरगाह तथा सीमा शुल्क अधिकारियों के बीच चल रही खींचतान के कारण त्योहारी सत्र से पहले इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माताओं की सुधार संबंधी योजना पटरी से उतर सकती है। दोनों देशों में विभिन्न बंदरगाहों पर अटकी हुई खेपों की वजह से अब विनिर्माताओं को यह डर सता रहा है कि अगर मध्य जुलाई तक इस समस्या को हल नहीं किया जाता है, तो उनकी त्योहारी सत्र की योजनाओं पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है।
चूंकि बंदरगाह और सीमा शुल्क अधिकारी चीन से आने वाली खेपों को भारतीय बंदरगाहों पर रोक रहे हैं, इसलिए अग्रणी विनिर्माता अब अनिश्चित स्थिति में फंस गए हैं। मार्च और मई के बीच चीन से आपूर्ति शृंखला में गंभीर बाधा के बाद जून में खेपों का आना शुरू हुआ है। अधिकांश विनिर्माता बड़ी मात्रा में प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की खेपों की उम्मीद कर रहे थे क्योंकि उनका स्टॉक खत्म हो चुका था। हालांकि अब खेपों के फंसने के कारण उन्हें कोविड से पहले के समय वाले उत्पादन स्तर पर लौटने में और देर होने की चिंता सता रही है।
एक प्रमुख स्मार्टफोन कंपनी के शीर्ष अधिकारी ने कहा कि मध्य जुलाई तक उत्पादन को सामान्य स्तर पर ले जाने की योजना है। हमारे 60 प्रतिशत से अधिक उत्पादों के मॉडल अब उपलब्ध नहीं हैं क्योंकि लॉकडाउन के बाद नियंत्रित मांग में जो भी थोड़ी बहुत मात्रा हमारे पास उपलब्ध थी, वह खप चुकी है। उम्मीद की जा रही थी कि चीन से की जाने वाली आपूर्ति जून के अंत तक फिर से सामान्य हो जाएगी क्योंकि अब उनके कारखाने सामान्य क्षमता के लगभग 90 प्रतिशत स्तर पर चल रहे हैं। लेकिन खेपों के संबंध में हालिया दिक्कत ने हमारे सामने ऐसी बाधा खड़ी कर दी है कि हमारे जैसे विनिर्माता बचकर नहीं जा सकते हैं। आईडीसी के अनुसंधान निदेशक नवकेंदर सिंह के अनुसार इससे भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माताओं के सुधार में और देर हो सकती है। खास तौर पर इलेक्ट्रॉनिक्स सामान की सभी खेपों की भौतिक जांच व्यावहारिक नहीं है। प्रिंटेड सर्किट बोर्ड और डिस्प्ले पैनल जैसे कई प्रमुख घटकों के लिए हम पूरी तरह से चीन पर निर्भर हैं। इन चीजों की नाजुक प्रकृति को देखते हुए भौतिक जांच के लिए इन्हें खोलने से ये चीजें पूरी तरह खराब हो सकती हैं।
किसी फ्लैट पैनल टेलीविजन की लागत में 60 प्रतिशत से अधिक और स्मार्टफोन में 15 प्रतिशत से अधिक लागत डिस्प्ले पैनल की रहती है। इनका विनिर्माण अत्यधिक नियंत्रित वातावरण में किया जाता है और इन्हें सामान्य वातावरण में बाहर निकाले जाने पर शायद ये इस्तेमाल के लायक ही न रहें। इसके अलावा अगर इस समस्या का हल मध्य जुलाई तक नहीं निकाला जाता है, तो त्योहारी सत्र के लिए विनिर्माताओं की योजनाओं में रुकावट आएगी। हालांकि यह सत्र मध्य सितंबर से शुरू होता है, लेकिन श्याओमी, सैमसंग, वीवो, ओप्पो और ऐपल सहित सभी प्रमुख कंपनियां दुर्गा पूजा और दीवाली के दौरान मांग में होने वाले इजाफे को पूरा करने के लिए जून के अंत से ही तैयार हैंडसेट का स्टॉक करना शुरू कर देती हैं। मौजूदा मांग को पूरा करने के लिए स्टॉक नहीं बचा होने के कारण इस साल इनकी त्योहारी सत्र की आपूर्ति योजनाओं में पहले ही विलंब हो चुका है।
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन के अध्यक्ष एसके सराफ ने वाणिज्य मंत्रालय को लिखे पत्र में कहा है कि चीन से आने वाली सभी खेपों की भौतिक जांच से न केवल प्रक्रिया में देर हो रही है, बल्कि आयात लागत भी बढ़ रही है। चीन की खेपों की अतिरिक्त जांच के संबंध में सीमा शुल्क अधिकारियों के बीच किसी भी भ्रम की स्थिति को दूर करने के लिए मंत्रालय से अनुरोध करते हुए उन्होंने सरकार को सूचित किया कि चीन के अधिकारी अपने यहां कई खेपों को पकड़कर जवाबी कार्रवाई कर रहे हैं।

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First Published - June 26, 2020 | 11:44 PM IST

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