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डीएचएफएल : फिर बोली मंगा सकते हैं लेनदार

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Last Updated- December 14, 2022 | 8:54 PM IST

दिवालिया कंपनी दीवान हाउसिंग फाइनैंस कॉरपोरेशन (डीएचएफएल) के लेनदार इस कंपनी के लिए एक बार फिर बोली आमंत्रित कर सकते हैं और चारों बोलीदाताओं को अधिग्रहण के लिए अंतिम मौका मुहैया करा
सकते हैं। चारों बोलीदाता ओकट्री, अदाणी, पीरामल समूह और एससी लॉवी पहले ही तीसरे दौर की बोली जमा करा चुके हैं लेकिन इसे अभी खोला नहीं गया है क्योंकि कुछ बोलीदाताओं ने दूसरे दौर में अदाणी की सबसे ऊंची बोली पर यह कहते हुए एतराज जताया था कि वह पहले दौर में सिर्फ होलसेल बुक के लिए बोली लगा चुकी है लिहाजा वह पूरी कंपनी के लिए बोली नहीं लगा सकती। पीरामल समूह ने तीसरे दौर की पेशकश वाले ईमेल का पासवर्ड साझा नहीं किया क्योंंकि वह सूचना लीक होने को लेकर चिंतित था।
एक वरिष्ठ लेनदार ने कहा, चूंकि लेनदार अधिकतम वैल्यू चाहते हैं, लिहाजा वे बोलीदाताओं से कंपनी या उसके खुदरा, थोक या एसआरए खाते के लिए अंतिम बोली मांग सकते हैं। यह बोली अगली सीओसी बैठक से पहले मंगाई जा सकती है। सूत्र ने कहा, लेनदार सबसे ज्यादा अग्रिम भुगतान चाहते हैं और अन्य पेशकश नहीं चाहते जो उन्हें सात साल के बाद रकम दे।
पिछले साल दिसंबर में डीएचएफएल को कर्ज समाधान के लिए दिवालिया अदालत भेजा गया था जब कंपनी में काफी ज्यादा धोखाधड़ी पाई गई और लेनदारों का कुल बकाया 90,000 करोड़ रुपये पहुंच चुका था।
बोलीदाताओं के बीच रस्साकशी के बाद बैंकरों ने कानूनी सलाह ली कि कैसे पूरी प्रक्रिया को भविष्य में कानूनी अड़चन से बचाया जा सकता है। उन्होंने कहा, हम सभी लेनदारों को समान मौका देना चाहते हैं और चौथे दौर की बोली में सबसे ज्यादा अग्रिम रकम वाली पेशकश अंतिम बोलीदाता के चयन के लिहाज से सबसे अहम होगा।
पीरामल ने दूसरे दौर में खुदरा खाते के लिए बोली संशोधित कर 25,000 करोड़ रुपये कर दी थी, जिसमें 3,000 करोड़ रुपये के ब्याज के साथ भुगतान सात साल तक होना था। भुगतान की यह समयसारणी डीएचएफएल की पूरी परिसंपत्ति के लिए 31,000 करोड़ रुपये की पेशकश के साथ टुकड़ों में भुगतान जैसी थी क्योंंकि उसने भी सात साल में भुगतान की पेशकश की थी। ओकट्री व पीरामल की पेशकश में 12,000 करोड़ रुपये अग्रिम देने की बात थी, जो पहले ही डीएचएफएल के खाते में है।
पूरी कंपनी के लिए 31,250 करोड़ रुपये की पेशकश से अदाणी ने सभी बोलीदाताओं को चौंका दिया था और इस तरह से उसने सभी की पीछे छोड़ दिया और पीरामल ने सीओसी को इसकी शिकायत की थी। तीसरे दौर की पेशकश के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई।

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First Published - November 24, 2020 | 11:50 PM IST

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