नकदी की किल्लत से जूझ रही रियल्टी दिग्गज डीएलएफ के लिए अब परियोजनाएं पूरा करना ही मुश्किल हो रहा है।
कंपनी दिल्ली में देश का सबसे बड़ा सम्मेलन एवं प्रदर्शनी परिसर विकसित करने की अपनी परियोजना को बीच में ही छोड़ सकती है। इसके लिए कंपनी को 900 करोड़ रुपये में दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने 2 साल पहले 35 एकड़ जमीन दी थी।
कंपनी को इस जमीन पर सम्मेलन एवं प्रदर्शनी केंद्र, होटल और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बनाने थे। इस परियोजना के लिए 3 से 4 वर्ष का समय रखा गया था और इस पर 6,000 करोड़ रुपये की लागत आनी थी। लेकिन अब डीएलएफ पांव पीछे खींच सकती है।
दरअसल नकदी का टोटा होने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी वित्त मिलने में देर होने की वजह से डीएलएफ इस परियोजना में और निवेश करने की योजना पर दोबारा सोच रही थी। कंपनी योजना को अंतिम रूप देने में ही तकरीबन 100 करोड़ रुपये लगा चुकी है।
लेकिन डीडीए के सूत्रों के मुताबिक डीएलएफ इस मामले में हाथ खड़े कर चुकी है। कंपनी ने कहा है कि यदि इस परियोजना के लिए हुए करार में मौजूद शर्तों को बदला नहीं जाता है, तो वह आगे काम नहीं करेगी।
सूत्रों ने बताया कि इस सिलसिले में बातचीत चल रही है और पट्टे के लिए हुए करार में दी गई मूल शरत बदलवाने की गुंजाइश ढूंढी जा रही है। इस करार में तय समय के भीतर परियोजना पूरी करने और ऐसा न होने पर जुर्माना होने की शर्त हैं।
अलबत्ता करार में कहा गया है कि दोनों पक्षों की सहमति होने पर मियाद को बढ़ाया जा सकता है। अब डीएलएफ को परियोजना पूरी करने की मियाद बढ़वाने की जरूरत है। बताया जा रहा है कि वह करार की शरत बदलवाने की फिराक में है, जिससे सरकार की ओर से भी इस परियोजना में कुछ इक्विटी आ सके।
मौजूदा शर्तों में पूरा वित्तीय बोझ कंपनी के ही माथे पर आना है। डीएलएफ से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यदि शर्तों में तब्दीली नहीं होती है, तो कंपनी इस परियोजना को छोड़ देगी।
परियोजना का क्या है नक्शा
स्थान क्षेत्र (वर्ग मीटर)
सम्मेलन एवं प्रदर्शनी स्थल 86,400
300 कमरों वाला 5 स्टार होटल 30,000
250 कमरों वाला 3 स्टार होटल 15,000
250 कमरों वाला बजट होटल 15,000
व्यावसायिक और रिटेल स्पेस 36,600
कुल निर्माण क्षेत्र 1,83,300