नमक से लेकर सॉफ्टवेयर तक तमाम क्षेत्रों में कारोबार करने वाले टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराने या न कराने पर जल्द ही कोई निर्णय लिया जा सकता है। इस घटनाक्रम से जुड़े सूत्रों ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब टाटा संस में 66 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाला टाटा ट्रस्ट्स विवादों में घिरा है, होल्डिंग कंपनी को सूचीबद्ध कराने से समूह में स्थिरता आने की उम्मीद है।
हालांकि इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि टाटा संस को ऊपरी स्तर की गैर-बैंकिंग वितीय कंपनी (एनबीएफसी) का दर्जा दिए जाने के मसले पर विचार किया जा सकता है। मगर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने किसी खास कंपनी के मामले में फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं की है। इस संबंध में जानकारी के लिए आरबीआई को भेजे गए सवालों का खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं आया।
आरबीआई ने 2022 में टाटा संस सहित 15 कंपनियों को ऊपरी स्तर की एनबीएफसी के रूप में वर्गीकृत किया था और उन्हें 30 सितंबर, 2025 तक सूचीबद्ध होने का निर्देश दिया था। मगर बाद में टाटा संस ने आरबीआई से अनुरोध किया कि उसे अपनी ‘कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी’ (सीआईसी) का पंजीकरण सरेंडर करने की अनुमति दी जाए और इसके लिए उसने खुद को शुद्ध रूप से कर्ज मुक्त बना लिया था।
आरबीआई ने इस मामले में अब तक कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है। मगर टाटा संस 30 सितंबर, 2025 की निर्धारित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) तारीख के बीत जाने के बाद भी एक प्राइवेट कंपनी बनी हुई है।
आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को नीतिगत फैसले के बाद संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि एनबीएफसी के वर्गीकरण के लिए एक संशोधित ढांचा बहुत जल्द जारी किया जाएगा। इससे पहले आरबीआई ने अक्टूबर 2022 में स्केल आधारित नियामकीय ढांचे के तहत एनबीएफसी को चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया था ताकि सख्त नियम लागू किए जा सकें।
स्केल आधारित नियम लागू होने के बाद आरबीआई हर साल 15 ऊपरी श्रेणी के एनबीएफसी के नामों की घोषणा करता है। पिछली सूची जनवरी 2025 में जारी की गई थी जिसमें आरबीआई ने कहा था, ‘एनबीएफसी की ऊपरी श्रेणी की सूची में टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड को शामिल करना पंजीकरण रद्द करने के उसके आवेदन के परिणाम पर कोई असर नहीं डालेगा जिसकी जांच जारी है।’
मल्होत्रा से जब पूछा गया कि इस साल की ऊपरी श्रेणी की सूची कब जारी होगी तो उन्होंने नए ढांचे के बारे में बात की।
उम्मीद है कि नया ढांचा यह स्पष्ट करेगा कि टाटा संस को ऊपरी स्तर की एनबीएफसी के तौर पर वर्गीकृत किया जाएगा या नहीं। एक सूत्र ने बताया कि इसी स्पष्टता के आधार पर टाटा संस संभवतः सूचीबद्ध होने की दिशा में कोई कदम उठाएगी।