रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) की रिटेल इकाई और फ्यूचर गु्रप के बीच सौदा जहां उद्योगपति मुकेश अबानी की कंपनी के शेयरधारकों के लिए सकारात्मक है लेकिन दूसरी कंपनी के लिए इसके लाभ को लेकर विश्लेषक ज्यादा उत्साहित नहीं हैं। 24,713 करोड़ रुपये का यह सौदा रिलायंस रिटेल को अपनी भौगोलिक पहुंच, उत्पाद पोर्टफोलियो और अपने बैक-एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करने में सक्षम बनाएगा। वहीं फ्यूचर गु्रप के लिए इस सौदे से उसके ऋण बोझ में कमी लाने और शेष व्यवसायों को फ्यूचर एंटरप्राइजेज के साथ समेकित करने में मदद मिलेगी।
समझौते की बड़ी लाभार्थी स्पष्ट तौर पर रिलायंस रिटेल है। पूरे देश में 11,784 स्टोर चालाने वाली इस कंपनी को अब फ्यूचर गु्रप के करीब 1,500-2,000 स्टोरों तक पहुंच बनाने का मौका मिलेगा, जिससे उसके नेटवर्क में 13-17 प्रतिशत की वृद्घि हो जाएगी। क्षेत्रवार, यह वृद्घि फ्यूचर गु्रप की 2 करोड़ वर्ग फुट (रिलायंस रिटेल के 2.87 करोड़ वर्ग फुट के मुकाबले) की रिटेल उपस्थिति को देखते हुए करीब 70 प्रतिशत होगी।
एसबीआईकैप सिक्योरिटीज में इंस्टीट्यूशनल इक्विटी रिसर्च के प्रमुख राजीव शर्मा कहते हैं, ‘रिलायंस के लिए फ्यूचर गु्रप परिसंपत्तियों के अधिग्रहण का मुख्य लाभ नए क्षेत्रों का शामिल होना, विस्तृत उपस्थिति को देखते हुए आपूर्तिकर्ताओ के साथ बेहतर सौदे करने की क्षमता में वृद्घि होना है।’
विश्लेषकों का अनुमान है कि घरेलू ब्रांडों समेत पूरे देश में फ्यूचर गु्रप की परिसंपत्तियों की सफलता को दोहराने में भारत की सबसे बड़ी रिटेलर को करीब तीन साल लगेंगे। इस संदर्भ में विश्लेषकों का मानना है कि 24,713 करोड़ रुपये के मूल्यांकन और फ्यूचर एंटरप्राइजेज में 2,800 करोड़ रुपये के निवेश के साथ कुल निवेश 27,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
इलारा कैपिटल के अखिल पारेख जैसे विश्लेषकों का कहना है कि यह सौदा रिलायंस रिटेल के लिए आय वृद्घि वाला होगा। इससे अधिग्रहीत परिचालन से राजस्व में मदद मिलेगी। उनका कहना है कि हालांकि आरआईएल के निवेशकों को अभी धैर्य बनाए रखना होगा क्योंकि समेकन प्रक्रिया जटिल है और इसमें समय लग सकता है।
हालांकि इसकी वजह है कि कुछ विश्लेषक अधिग्रहणों के पिछले अनुभव की वजह से सतर्कता बरत रहे हैं। जहां विश्लेषक रिलायंस रिटेल के फैशन सेगमेंट में इस सौदे से फायदा होने की बात कह रहे हैं, वहीं वह इसे लेकर भी संकेत दे रहे हैं कि क्रियान्वयन चुनौतीपूर्ण होगा, जैसा कि आदित्य बिड़ला फैशन ऐंड रिटेल (एबीएफआरएल) द्वारा फ्यूचर गु्रप से पैंटालूंस अधिग्रहण के कायाकल्प के मामले में देखने को मिला था। कुछ बड़े स्टोर राजस्व में ज्यादा योगदान दे रहे थे और एबीएफआरएल को निवेश पर प्रतिफल पाने की राह पर आने में दो साल का समय लगा था।
जहां रिलायंस रिटेल (मौजूदा समय में परिचालन लाभ के मुकाबले 30 गुना उद्यम वैल्यू या ईवी) का मूल्यांकन बढ़ेगा, वहीं बाजार की नजर नए निवेशकों पर रहेगी जो कंपनी के मूल्यांकन के लिए मानक तैयार करेंगे। आरआईएल के 2,100 रुपये प्रति शेयर के कीमत लक्ष्य में से करीब आधा जियो प्लेटफॉम्र्स (जियो) और करीब 28 प्रतिशत या 600 रुपये प्रति शेयर का मूल्यांकन रिलायंस रिटेल की वजह से है। रिलायंस रिटेल का योगदान अब बढ़कर 700-750 रुपये प्रति शेयर हो सकता है।
फ्यूचर समूह के शेयरधारकों के लिए, प्रमुख सूचीबद्घ समूह कंपनियों का फ्यूचर एंटरप्राइजेज के साथ विलय फायदेमंद स्थिति हो सकती है। हालांकि ऐसा नहीं हो सकता है। 20.20 के स्वैप अनुपात और फ्यूचर एंटरप्राइज (एफईएल) की बाजार कीमत को देखते हुए पांच गैर-एफईएल सूचीबद्घ इकाइयों के लिए शुक्रवार के बंद भाव के मुकाबले महंगा है। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि यदि फ्यूचर एंटरप्राइज का शेयर मूल्यांकन चिंताओं से गिरता है तो आर्बीट्राज अवसर उपलब्ध नहीं हो सकता है।
समूह इकाइयों के एफईएल में विलय के बाद, एफईएल की ईवी 27,000 करोड़ रुपये के आसपास पहुंच गई है। संयुक्त उपक्रमों को छोड़कर, कंपनी के लिए र्ईवी-परिचालन लाभ 58 गुना पर है। एफएमसीजी और फैशन की बाहरी निर्माता के लिए सौदे के बाद मूल्यांकन रिटेल सेगमेंट (एवेन्यू सुपरमाट्र्स) सौदों में महंगे शेयर को देखते हुए काफी ऊपर है।
विश्लेषकों का कहना है कि जहां फ्यूचर गु्रप ने रिलायंस रिटेल के लिए आपूर्ति अवसरों से 20-25 प्रतिशत राजस्व वृद्घि और मार्जिन वृद्घि की संभावना जताई है, वहीं मौजूदा इकाइयों के लिए प्रीमियम काफी अधिक है। इसके अलावा, तरजीही निर्गम की कीमत 16-17 रुपये प्रति शेयर के आसपास है जिससे एफईएल की मौजूदा कीमत के मुकाबले 15-20 प्रतिशत की कमी का संकेत मिलता है।