आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (आईटीएटी) ने टाटा टस्टों के संबंध में सूचना तक पहुंच को लेकर पूर्व टाटा संस चेयरमैन साइरस मिस्त्री के खिलाफ की गईं खास टिप्पणियों को वापस ले लिया है। न्यायाधिकरण ने स्पष्टï किया है कि वह अनजाने में यह जिक्र करने में विफल रहा था कि मिस्त्री द्वारा पेश सूचना आयकर नोटिस की प्रतिक्रिया में थी। न्यायाधिकरण का यह कदम तीन प्रमुख टाटा ट्रस्टों को कर छूट बहाल करते वक्त मिस्त्री के खिलाफ टिप्पणियां किए जाने के बाद सामने आया है। बुधवार को, जस्टिस पीपी भट्टï और प्रमोद कुमार के नेतृत्व वाले न्यायाधिकरण के पीठ ने कहा कि 28 दिसंबर का आदेश संशोधित किया गया है। सोमवार को न्यायाधिकरण ने तीन टाटा टस्टों – सर दोराबजी ट्रस्ट, जेआरडी ट्रस्ट और रतन टाटा ट्रस्ट के कर छूट दर्जे को बहाल कर दिया और कर अधिकारियों के उस दावे को खारिज कर दिया कि इन ट्रस्टों ने कर राहत से संबंधित विभिन्न नियमों का उल्लंघन किया।
समान फैसले में, आईटीएटी ने कहा था, ‘आयकर विभाग को दस्तावेज पहुंचाने का उनका (मिस्त्री) का कदम कंपनी से किसी तरह की अनुमति के बगैर उठाया गया था।’ बुधवार को, न्यायाधिकरण ने उनसे संबंधित पैराग्राफ में टाइपिंग संबंधित गलतियों को सुधारा। इसमें कहा गया है, ‘यह ज्ञात है कि साइरस मिस्त्री (टाटा समूह के पूर्व चेयरमैन) को 24 अक्टूबर, 2016 को टाटा समूह में उनकी जिम्मेदारी से हटा दिया गया था, और उनके हटाए जाने के 8 सप्ताह के अंदर, उन्होंने नोटिस के जवाब में यह सामग्री भेजी।’
न्यायाधिकरण के इस शुद्घि-पत्र पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए शापूरजी पलोंजी समूह ने कहा है, ‘हमें पता है कि न्यायाधिकरण ने मिस्त्री के खिलाफ लगाए गए व्यक्तिगत आरोपों को ठीक करने के लिए यह शुद्घि-पत्र भेजा है।’
जहां हम सभी अतीत में टाटा ट्रस्टों द्वारा किए गए अच्छे कार्य को लेकर बेहद उत्साहित हैं, वहीं आज सवाल यह है कि क्या ये निर्णय शासन के उच्च मानकों से विचलित करने वाले हैं। मिस्त्री परिवार ने कई दशकों से टाटा संस के संरक्षक के तौर पर काम किया है। मिस्त्री समूह का कहना है कि लंबे समय से हम टाटा समूह के साथ जुड़े रहे हैं और सच्चाई तथा पारदर्शिता के लिए लगातार आवाज उठाएंगे। मिस्त्री समूह का कहना है कि मौजूदा ट्रस्टियों (जो जिम्मेदार व्यक्ति हैं) ने अपने परोपकारी कार्य के जरिये लाखों भारतीयों की जिंदगी सुधारने के महान लक्ष्य के साथ काम किया है।
समूह द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है, ‘हरेक मोड़ पर मिस्त्री को दोषी साबित करने के बजाय, टाटा ट्रस्टों के ट्रस्टियों को इसे लेकर आत्मनिरीक्षण करना चाहिए कि वह रास्ते से क्यों भटक गए हैं, जिससे विभिन्न सरकारी संस्थाओं द्वारा उनके परिचालन पर सख्त जांच की स्थिति पैदा हुई है।’