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शेवरॉन और रिलायंस पेट्रो का रिश्ता टूटा!

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Last Updated- December 10, 2022 | 12:05 AM IST

रिफाइनिंग लाभ के खस्ताहाल और तेल की मांग में हो रही कमी के बीच अमेरिकी तेल कंपनी शेवरॉन कॉर्प. मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंड्रस्ट्रीज (आरआईएल) की सहयोगी कंपनी रिलायंस पेट्रो.(आरपीएल) जैसी लाभ में नहीं चलने वाले उद्यमों से अपना पल्ला झाड़ सकती है।
इस घटनाक्रम से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि शेवरॉन ने आरपीएल से अभी तक कच्चे तेल और इसके उत्पादों की आपूर्ति को लेकर किसी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किया है। शेवरॉन ने आरपीएल में अपनी 5 फीसदी की हिस्सेदारी को बढ़ाने की भी कोई योजना नहीं बना रही है।
30 जनवरी को शेवरॉन के प्रमुख कार्यकारी अधिकारी डेविड ओ’ रिली ने विश्लेषकों को बताया था कि वे लाभ में नहीं चल रहे रिफाइनिंग बाजार से अपना हाथ खींच रहे हैं और वे ऐसा आगे भी जारी रखेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी कहा था कि वे अपने संयुक्त वेंचर सहयोगी आरआईएल से लगातार संपर्क में है।
कंपनी इस बात पर पूरी नजर रख रही है कि आरआईएल भारत में तेल निकालने का काम कितनी आक्रामकता के साथ जारी रखती है। लगभग ढाई साल पहले शेवरॉन ने आरपीएल में 5 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी।
आरआईएल के साथ किए गए समझौते के मुताबिक, आरपीएल द्वारा गुजरात के जामनगर में तेल निकालने के तीन महीने बाद या अप्रैल 2009 तक, जो भी पहले हो, शेवरॉन कंपनी में अपनी हिस्सेदारी 29 फीसदी तक बढ़ा सकती है। सूत्रों की मानें, तो मौजूदा बाजार स्थिति के दौर में 9 हजार करोड़ रुपये का निवेश कर हिस्सेदारी करना उचित नहीं है।
बिानेस स्टैंडर्ड को ई-मेल के जरिये शेवरॉन इंडिया के अध्यक्ष जॉन डिग्बी ने बताया, ‘प्रतिस्पर्द्धी कारणों से भारत में निवेश की किसी योजना के बारे में अभी कोई टिप्पणी करना उचित नहीं है।’ उधर इस पर आरआईएल के अधिकारियों ने भी किसी तरह की टिप्पणी देने से इनकार कर दिया।
अगर शेवरॉन और 24 फीसदी हिस्सेदारी खरीदती है, तो आरआईएल की हिस्सेदारी घटकर 46 फीसदी रह जाएगी। मुकेश अंबानी द्वारा प्रवर्तित प्रोमोटरों की आरपीएल में हिस्सेदारी अभी 54 फीसदी है।
निर्धारित समय के लक्ष्य को पाने के लिए आरपीएल ने 25 दिसंबर को जामनगर में 5 लाख 80 हजार बैरल तेल प्रतिदिन निकालना शुरू कर दिया था, लेकिन पूरी क्षमता में तेल शोधन के काम में कंपनी को तीन से चार महीने का और वक्त लग सकता है।
एक सूत्र ने कहा, ‘ आरआईएल के साथ हुए समझौते के तहत इस साल या तो शेवरॉन अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकती है या वह अपना पल्ला आरपीएल से झाड़ सकती है। अगर शेवरॉन हाथ खींचती है, तो वह 60 रुपये प्रति शेयर की दर से अपनी 5 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी, जिस दर पर शेवरॉन ने 2006 में हिस्सेदारी खरीदी थी। लेकिन अगर शेवरॉन अपनी हिस्सेदारी बढ़ाती है, तो उसे मौजूदा बाजार भाव का भुगतान करना होगा।’

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First Published - February 5, 2009 | 3:13 PM IST

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