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नकदी ने बहुतै नाच नचायो

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Last Updated- December 10, 2022 | 12:25 AM IST

नकदी की किल्लत से जूझ रही रिटेल कंपनी सुभिक्षा ट्रेडिंग सर्विसेज को रियायत देने के लिए  कर्जदाता तैयार हो गए हैं। लेकिन आईसीआईसीआई बैंक समेत इन कर्जदाताओं ने कंपनी के बहीखातों के दोबारा ऑडिट की बात कही है।
इस कवायद से जुड़े एक वरिष्ठ बैंकर ने बताया, ‘सुभिक्षा को कर्ज देने वाले बैंकों ने बहीखातों की पड़ताल करने की बात कही है। दरअसल इसका मकसद कंपनी की संपत्तियों और वित्तीय मानदंडों की सही तस्वीर हासिल करना है। यह ऑडिट रिपोर्ट चालू वित्त वर्ष के अंत यानी इसी साल मार्च तक तक आने की उम्मीद है।’
यह शायद पहला मौका है, जब किसी रिटेल कंपनी के कर्ज को नए सिरे से तय करने (सीडीआर) की बात कही गई है। भारतीय रिजर्व बैंक ने कुछ महनों पहले ही सेवा क्षेत्र की कंपनियों का सीडीआर करने की अनुमति दी थी।
इस बारे में संपर्क करने पर सुभिक्षा के संस्थापक और प्रबंध निदेशक आर सुब्रमण्यन ने कहा, ‘हमारे खातों का ऑडिट 31 मार्च 2008 तक के लिए किया गया है। खराब संपत्तियों को जांचने खास तौर पर स्टॉक के खराब हिस्से का सही पता लगाने के लिए दोबारा ऑडिट किया जा रहा है क्योंकि पिछले तीन-चार महीनों में कामकाज धीमा होने की वजह से काफी स्टॉक खराब होने की आशंका है।
हम आम तौर पर खाद्य पदार्थ बेचते हैं, जो जल्दी खराब हो जाता है। पिछले तीन-चार महीनों में कारोबार मद्धम होने की वजह से इनमें से ज्यादातर स्टॉक खराब हो सकता है।’
सुभिक्षा ने जब पहली बार किसी तिमाही में घाटा दर्ज किया और अपने कर्मचारियों को तनख्वाह और अन्य देनदारियों को चुकाने में असमर्थता जाहिर की तब सभिक्षा के मामले में कर्ज को दोबारा से तय करने के बारे में तय किया गया। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कई बैंकर जुड़े होते हैं।
वैसे तो बैंकरों का कहना है कि अभी इस मसले पर चर्चा शुरू नहीं हुई है लेकिन कर्ज अदायगी में कुछ समय की छूट देने और कर्ज के कुछ हिस्सों को परिवर्तनीय उपकरणों में तब्दील किया जा सकता है।
लेकिन एक बैंकर का यह भी कहना है, ‘अगर हालात बेहद खराब हुए तो फिर कुछ कडे क़दम भी उठाने पड़ सकते हैं।’ वहीं एक और बैंकर का कहना है कि इस मामले में सीडीआर के जरिये काफी मदद मिल सकती है।
एक वक्त सबसे कम कीमत पर उत्पाद मुहैया कराने का दावा का दावा करने वाली चेन्नई की इस रिटेल कंपनी की हालत इस समय बेहद खराब है। सुब्रमण्यन पहले ही कह चुके हैं कि कंपनी के कामकाज को चलाने के लिए इस वक्त तीन सौ करोड़ रुपये की सख्त जरूरत है। उन्होंने बैंकों के सामने कम ब्याज दर पर कर्ज देने के लिए भी गुहार लगाई है। 
अपनी शर्तों पर छूट देने को तैयार दिख रहे हैं बैंक

सीडीआर के दायरे में आने वाली सुभिक्षा पहली रिटेल कंपनी 

कंपनी के बहीखातों की दोबारा हो रही है जांच 

बैंकों से लगाई कम ब्याज दर पर कर्ज देने की गुहार

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First Published - February 8, 2009 | 11:35 PM IST

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