facebookmetapixel
Advertisement
Sugar Price: मॉनसून की मार से चीनी महंगी, जानें क्यों बढ़ रही हैं कीमतें और आगे क्या होगा?कच्चे तेल की कीमतें घटीं, फिर भी पेट्रोल-डीजल महंगा क्यों? हरदीप पुरी ने बताई वजहInvesco Mutual Fund ने SIF सेगमेंट में रखा कदम, लॉन्च किया समिट इक्विटी लॉन्ग-शॉर्ट फंड; क्या है इसमें खास?India-EU FTA: 10-12 दिन में पूरी होगी कानूनी समीक्षा, गोयल बोले- साल के अंत तक होगी डील30 चुनिंदा मिडकैप शेयरों में निवेश का मौका, 17 जुलाई तक खुला रहेगा MOMF का नया इंडेक्स फंडMirae Asset MF ने उतारे 2 नए मिडकैप फंड, ₹5,000 से निवेश शुरू; प्राइस मोमेंटम वाले शेयरों पर फोकसविदेशी फंड्स में लौटी निवेशकों की दिलचस्पी, 40% रिटर्न और ₹7,600 करोड़ के इनफ्लो ने बदला ट्रेंडSBI Mutual Fund का IPO अगले हफ्ते आ सकता है, ₹11,400 करोड़ जुटाने की तैयारी: रिपोर्टModi-Takaichi बैठक में बड़ा फैसला! AI, ग्रीन एनर्जी और डिफेंस में भारत-जापान मिलकर करेंगे कामRed Bull से Monster तक कई एनर्जी ड्रिंक कंपनियों पर FSSAI का शिकंजा, भ्रामक दावों पर भेजा नोटिस

‘अम्बे’ से बाहर होगी केयर्न!

Advertisement
Last Updated- December 10, 2022 | 12:17 AM IST

ब्रिटेन की कंपनी केयर्न एनर्जी की इकाई केयर्न इंडिया को गुजरात की अम्बे फील्ड ब्लॉक से पीछे हटना पड़ सकता है ।
क्योंकि कंपनी हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय (डीजीएच) को निर्धारित समयावधि में ब्लॉक में होने वाली विकासात्मक कार्यक्रमों का ब्योरा नहीं सौंप पाई है। अम्बे फील्ड में केयर्न इंडिया की 40 फीसदी, ऑयल ऐंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) की 50 फीसदी और टाटा पेट्राडाइन की 10 फीसदी हिस्सेदारी है।
केयर्न इंडिया ने 2001 में कैम्बे बेसिन में तेल और गैस की खोज की थी। कंपनी को मार्च 2008 तक डीजीएच के सामने विकास योजना की रपट सौंपनी थी, लेकिन कंपनी निर्धारित अवधि में ऐसा नहीं कर पाई।
डीजीएच के महानिदेशक वी. के. सिब्बल ने कहा, ‘अम्बे फील्ड की विकास योजना सौंपने का समय बीत गया है। अब कंपनी को ब्लॉक में खोज का काम छोड़ना होगा।’ इस देरी के बाद डीजीएच ने केयर्न-ओएनजीसी कंसोर्टियम से कहा है कि या तो ब्लॉक में तेल और गैस की खोज का काम छोड़ दें या लिक्विडेटेड चार्ज अदा करें और बैंक गारंटी भरें। हालांकि केयर्न के अधिकारियों ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
ओएनजीसी के एक अधिकारी ने बताया, ‘अम्बे नेल्प से पहले का ब्लॉक है और जब उत्पादन साझेदारी की बात चल रही थी, तो बैंक गारंटी या लिक्विडेशन चार्ज की बात नहीं कही गई थी। हम इस मामले में डीजीएस से बात कर रहे हैं।’
ओएनजीसी के एक दूसरे अधिकारी ने कहा कि अगर इस ब्लॉक से तेल और गैस की खोज शुरू हो जाती, तो शायद ब्लॉक छोड़ने की बात नहीं उठती। उन्होंने कहा, ‘ब्लॉक छोड़ने की बात तब की जाती है, जब कंपनी ने या तो निर्धारित समय में काम पूरा नहीं किया या वे तेल या गैस की खोज नहीं कर पाई।’

Advertisement
First Published - February 6, 2009 | 10:58 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement