देश की सबसे बड़ी व्यावसायिक जमीन का सौदा रद्द होने के कगार पर है। 11 मार्च, 2008 को तमाम बड़ी बिल्डर कंपनियों को पछाड़ते हुए बीपीटीपी ने नोएडा प्राधिकरण से 5006 करोड़ रुपये में यह सौदा हासिल किया था।
लेकिन बीपीटीपी ने नोएडा सेक्टर-94 स्थित 95 एकड़ यानी कि 3 लाख 82 हजार वर्गमीटर जमीन के इस सौदे के लिए तय रकम चुकाने में खुद को असमर्थ बताया है। अब प्राधिकरण डिफाल्टर के लिए तैयार किए गए नए नियम के तहत बीपीटीपी के आवेदन पर कार्रवाई करेगा।
सूत्रों के मुताबिक नोएडा प्राधिकरण बीपीटीपी के इस आवेदन को स्वीकार कर लेता है तो अब तक जमा किए गए 1,235 करोड़ रुपये का 10 फीसदी यानी 123.5 करोड़ रुपये बतौर जुर्माना प्राधिकरण के खाते में चला जाएगा।
बाकी की रकम के बदले कंपनी को 86 हजार वर्ग मीटर जमीन दी जाएगी। कंपनी को नकद के रूप में कोई राशि नहीं मिलेगी। अभी यह तय नहीं है कि यह जमीन नोएडा सेक्टर-94 में ही दी जाएगी या किसी और जगह पर।
बीपीटीपी ने 1 लाख 30 हजार 207 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से इस व्यावसायिक जमीन को खरीदने की बोली लगायी थी। कंपनी को हर तीन माह पर तय राशि जमा करनी थी। लेकिन मंदी के कारण कंपनी बाजार से पैसा नहीं जुटा पायी और पहली किस्त की अदायगी के बाद से ही कंपनी खुद को असमर्थ पा रही थी।
लगातार तीन किस्त नहीं चुकाने वाली कंपनी को डिफाल्टर घोषित करने के लिए प्राधिकरण स्वतंत्र होता है। बीपीटीपी को कुल राशि का भुगतान 8 सालों के दौरान 16 किस्तों में करना था। सौदे वाले दिन कंपनी के प्रबंध निदेशक काबुल चावला ने कहा था कि वे इस जमीन पर विश्व स्तरीय व्यावसायिक केंद्र का निर्माण करेंगे।
कंपनी ने आंतरिक सुरक्षित रकम व बाहरी कर्ज के माध्यम से इस रकम को चुकाने की योजना बनायी थी। कंपनी ने तब इस जमीन पर व्यावसायिक केंद्र के निर्माण में 3000 करोड़ रुपये का अनुमान लगाया था। रियल एस्टेट के क्षेत्र की जानी मानी कंपनी बीपीटीपी की कई परियोजना फरीदाबाद, गुड़गांव, नोएडा व हैदराबाद में भी चल रही है।