प्रमुख यूरोपीय उपकरण निर्माता कंपनी नोकिया और एरिक्सन, दक्षिण कोरियाई उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद निर्माता कंपनी सैमसंग, ताइवान की इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माता सेवा (ईएमएस) कंपनियां फ्लेक्स (पुराना नाम फ्लेक्सट्रॉनिक्स) और फॉक्सकॉन तथा अमेरिकी कंपनी जाबिल इंक (यह भी एरिक्सन के लिए 5जी सक्षम रेडियो बनाती है) जैसी कंपनियां भारत सरकार की उत्पादन संबद्ध प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना में रुचि दिखा सकती हैं। दूरसंचार उपकरण क्षेत्र के लिए यह योजना कल घोषित की गई। इस योजना को लेकर सरकार से बातचीत करने वाली अन्य कंपनियों में सिस्को और सिएना शामिल हैं।
योजना के तहत सरकार कंपनियों को भारत में उत्पादन मूल्य के आधार पर पांच वर्ष तक सालाना 4 फीसदी से 6 फीसदी का प्रोत्साहन देगी, बशर्ते कि वे यहां वृद्धि संबंधी निवेश करें। सरकार ने योजना के तहत पांच वर्ष के लिए 12,195 करोड़ रुपये का आवंटन किया है। यह योजना पांच कंपनियों के लिए होगी।
नोकिया इंडिया के पास चेन्नई के निकट एक विनिर्माण संयंत्र पहले से है और उसके राजस्व का 50 प्रतिशत हिस्सा निर्यात से आता है। कंपनी ने हाल ही में यह घोषणा की है कि वह 5जी रेडियो का निर्यात कर रही है। सूत्रों का कहना है कि कंपनी अपनी 70-80 प्रतिशत क्षमता मौजूदा संयंत्र में इस्तेमाल कर सकती है और वह आगे विस्तार पर विचार करेगी। नोकिया के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘हमेंं आशा है कि यह प्रोत्साहन देश में दूरसंचार उपकरण निर्माण क्षेत्र को उचित गति प्रदान करेगा।’ जाबिल इंक भारत में एरिक्सन के लिए 5जी सक्षम रेडियो बनाती है। एरिक्सन इंडिया के प्रवक्ता ने कहा, ‘हम पीएलआई योजना का स्वागत करते हैं, हालांकि अभी विशिष्ट योजनाओं को लेकर टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी।’ एरिक्सन इंडिया के प्रबंध निदेशक नितिन बंसल बिज़नेस स्टैंडर्ड के साथ साक्षात्कार में कह चुके हैं कि वह भारत से अधिक निर्यात करना चाहेंगे और कंपनी अपनी क्षमता में विस्तार कर सकती है। कंपनी उस निवेश का श्रेय चाहती है जो वह पहले ही कर चुकी है और जहां अभी भी क्षमता शेष है। विशेषज्ञों का कहना है कि नई नीति मेंं इस विषय का ध्यान रखना होगा।
फ्लेक्स, जाबिल इंक, फॉक्सकॉन के साथ-साथ सिस्को, सिएना और सैमसंग इंडिया ने प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया।
योजना का लाभ लेने के लिए न्यूनतम 100 करोड़ रुपये का निवेश होना चाहिए। अर्हता हासिल करने के बाद कंपनियों को न्यूनतम प्रोत्साहन सीमा का 20 गुना तक प्रोत्साहन दिया जाएगा। यह उन्हें इस्तेमाल से बची क्षमता के उपयोग अवसर देगा। यानी साल में 20 करोड़ रुपये का निवेश करने वाली कंपनी को उत्पादन मूल्य पर 400 करोड़ रुपये तक का पीएलआई मिलेगा।