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सरकार के नए नियम से बैटरी कंपनियां परेशान! खुद रिसाइक्लिंग करने पर भी खरीदना पड़ रहा सर्टिफिकेट

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बैटरी रिसाइक्लिंग सर्टिफिकेट के नए नियमों को लेकर एक्साइड, अमारा राजा समेत कई कंपनियों ने सरकार के सामने चिंता जताई है

Last Updated- July 06, 2026 | 8:13 AM IST
battery recycling

भारत के प्रमुख लेड-एसिड बैटरी विनिर्माताओं ने रिसाइक्लिंग सर्टिफिकेट के नए नियम को लेकर केंद्र सरकार के समक्ष चिंता जताई है। इस नियम के तहत कंपनियों को उन बैटरियों के लिए रिसाइक्लिंग सर्टिफिकेट खरीदने पड़ रहे हैं, जिन्हें उन्होंने अपने खर्चे पर खुद रिसाइकल किया है।

बिज़नेस स्टैंडर्ड को मिली जानकारी के मुताबिक विनिर्माताओं ने सरकार से कहा है कि इस्तेमाल की गई बैटरी एकत्र करने और उसे निजी रिसाइक्लिंग संयंत्रों में या किसी अधिकृत रिसाक्लर्स से रिसाइलकर कराने वालों को इन उत्पादों के लिए सर्टिफिकेट खरीदने को मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।

केंद्र सरकार ने ऐसे रिसाइक्लिंग सर्टिफिकेट के लिए एक ऑनलाइन मार्केट का प्रस्ताव रखा है। विनिर्माताओं का मानना है कि यह बाजार उन्हें रिसाइक्लिंग संयंत्रों में निवेश करने से हतोत्साहित कर सकता है। इस मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस साल मार्च से अब तक भारतीय बैटरी निर्माता एसोसिएशन (आईबीएमए) की ओर से पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को दी गई दो प्रस्तुतियों में इस तरह की चिंताएं जताई हैं। आईबीएमए के सदस्यों में एक्साइड इंडस्ट्रीज, अमारा राजा एनर्जी ऐंड मोबिलीटी, ल्यूमिनस पॉवर टेक्नोलॉजिज, लिवगार्ड एनर्जी टेक्नोलॉजिज और ओकाया पॉवर जैसी कंपनियां शामिल हैं।

बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियम (बीडब्ल्यूएमआर), 2022 के तहत बैटरी निर्माताओं को यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि उनके द्वारा बेची गई बैटरियों के तय अनुपात में खराब हुई बैटरियों को एकत्र कर उन्हें रिसाइकल करें।
जब कोई अधिकृत रिसाइक्लर पुरानी बैटरियों को रिसाइकल करता है और सीसे जैसी सामग्री को पुनः प्राप्त करता है, तो यह रिसाइकल की गई मात्रा के अनुरूप एक ‘विस्तारित उत्पादक जिम्मेदारी’ प्रमाणपत्र (ईपीआर) मिलता है। बैटरी विनिर्माता इसका उपयोग नियमों के तहत रिसाइक्लिंग बाध्यता पूरी करने के लिए करते हैं।

आईबीएमए की प्रस्तुतियां रिसाइक्लिंग सर्टिफिकेट की खरीद और बिक्री के लिए एमएसटीसी द्वारा तैयार किए गए इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म लागू किए जाने को लेकर थीं। इस प्लेटफॉर्म के लिए प्रशिक्षण सत्रों के दौरान आईबीएमए के सदस्यों को सूचित किया गया था कि सभी सर्टिफिकेट लेनदेन अब प्लेटफॉर्म के माध्यम से होंगे, लेनदेन पूरा होने तक खरीदार और विक्रेता की पहचान सार्वजनिक नहीं होगी और सर्टिफिकेट को पर्यावरण मुआवजे से जुड़ी एक निर्धारित मूल्य सीमा के भीतर ही ट्रेड किया जाना चाहिए।

आईबीएमए ने मंत्रालय को बताया है कि यह इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म उद्योग को भारी चोट पहुंचाएगा और सीसे को लेकर जारी किए गए बीएमडब्ल्यूआर, 2022 के मकसद को विफल कर देगा। एसोसिएशन की प्रमुख चिंता कैप्टिप रिसाइक्लिंग इकाइयों या रिसाइक्लिंग संयंत्रों को लेकर है, जो बैटरी विनिर्माताओं के हैं, लेकिन अलग इकाई की तरह चलते हैं।

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First Published - July 6, 2026 | 8:13 AM IST

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