कमोडिटी

रिकॉर्ड हाई पर तांबा! महंगे भाव ने बिगाड़ा मेटल ट्रेडर्स का गणित, अब कर्ज की भी दिक्कत

वैश्विक बाजार में तांबा के दाम पिछले एक साल में करीब 50 फीसदी बढ़कर 14,500 डॉलर प्रति टन के पार पहुंच गए हैं वहीं घरेलू बाजार में तांबा की कीमतें बढ़कर 1400 रुपये प्रति किलोग्

Published by
सुशील मिश्र   
Last Updated- September 09, 2026 | 3:38 PM IST

Copper Price Hike:  तांबे की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी देखने को मिल रही है। तांबे की कीमतों में पिछले एक साल में करीब 50 फीसदी का भारी उछाल आया है, जिसे मजबूत मांग से सहारा मिल रहा। बढ़ती मांग के बीच टैरिफ लगाएं जाने की आशंका की वजह से तांबा अमेरिकी गोदामों में स्टॉक तेजी से बढ़ रहा है। नतीजतन,  इलेक्ट्रॉनिक कंपनियों का गणित बिगड़ रहा है।

क्यों उछल रही तांबे की कीमतें?

वैश्विक बाजार में तांबा के दाम पिछले एक साल में करीब 50 फीसदी बढ़कर 14,500 डॉलर प्रति टन के पार पहुंच गए हैं। घरेलू बाजार में तांबा की कीमतें बढ़कर 1400 रुपये प्रति किलोग्राम के ऊपर पहुंच चुकी हैं। कीमतें बढ़ने मुख्य वजह पावर ग्रिड, रिन्यूएबल एनर्जी उपकरण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेटा सेंटर और इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर से आ रही मजबूत डिमांड है।

साथ ही यह चिंता भी कॉपर की कीमतों को सहारा दे रही है कि सप्लाई की ग्रोथ, डिमांड की रफ्तार के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रही है। तांबा (कॉपर) एक अहम औद्योगिक धातु है, जिसका इस्तेमाल इसकी बेहतरीन इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी की वजह से सेमीकंडक्टर, बैटरी और पावर ग्रिड में बड़े पैमाने पर होता है ।

घरेलू बाजार में डेढ़ गुना महंगा हुआ तांबा

भारत मेटल एक्सचेंज के अध्यक्ष सुशील कोठरी कहते हैं कि तांबे की कीमतें दो वजह से बढ़ रही हैं  एक तो तांबे की मांग बहुत ज्यादा है दूसरी बाजार में ट्रंप के टैरिफ का डर है। बाजार को अंदेशा है कि ट्रंप अपनी आदत के मुताबिक तांबे पर भी टैरिफ लागू करने वाले हैं।

माना जा रहा है कि 2027 में 15 फीसदी और 2028 में 30 फीसदी टैरिफ लगने वाला है। जिसके कारण अमेरिका में भारी मात्रा में तांबे का स्टॉक जमा हो रहा है जो वैश्विक बाजार में तांबे की कीमतों को तेजी से बढ़ा रहा है।

घरेलू बाजार की बात की जाए तो पिछले एक साल कीमतें करीब डेढ़ गुना बढ़ गई है। घरेलू बाजार में इस समय तांबा 1400 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है जो एक साल पहले करीब 700 रुपये प्रति किलोग्राम था।

Also Read: महंगे क्रूड का असर! सोना 399 रुपये लुढ़का, चांदी 193 रुपये चढ़ी, चेक करें ताजा भाव

टैरिफ लागू होने की चिंता

SMC कमोडिटी की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल LME पर तांबे की कीमतों में करीब 18 फीसदी तेजी आई है। इसकी प्रमुख वजह टैरिफ लागू होने की आशंका में बड़ी मात्रा में तांबे का अमेरिका की ओर भेजा जाना है। अमेरिका के बाहर खासकर चीन में घटते कॉपर भंडार ने भी कीमतों में तेजी का समर्थन दिया है।

अमेरिका में कॉमेक्स तांबे का भंडार बढ़कर रिकॉर्ड 7,66,795 शॉर्ट टन यानी 6,95,624 मीट्रिक टन हो गया है। चीन में मैन्युफैक्चरिंग के पारंपरिक पीक सीजन में प्रवेश के साथ कॉपर की मांग बढ़ने की उम्मीद है। LME के पंजीकृत गोदामों में तांबे का भंडार मई के अंत तक करीब 40 फीसदी घट चुका है। वहीं SHFE का भंडार पिछले सप्ताह लगभग 63,000 टन रहा, जो मार्च के मध्य के उच्चतम स्तर से 85 फीसदी कम है और जनवरी 2024 के बाद सबसे निचचे स्तर पर है।

सप्लाई में कमी ने बढ़ाया दबाव

कॉपर की कीमतों में इस तेजी के पीछे सप्लाई साइड की दिक्कतें भी बड़ी वजह हैं. आने वाले दिनों में LME से 1.21 लाख टन से ज्यादा कॉपर बायर्स को डिलीवर होने की संभावना जताई जा रही है।

कैश कॉपर प्रीमियम भी 430 डॉलर प्रति टन के ऊपर पहुंच गया है, जो साल 2021 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। इसका मतलब है कि तेज डिमांड की वजह से खरीदार अतिरिक्त कीमत चुकाने को भी तैयार हैं । इसके अलावा शंघाई के वेयरहाउस में कॉपर का स्टॉक 85 फीसदी घटकर सिर्फ 63,000 टन रह गया है, जो सप्लाई की तंगी को और साफ तौर पर दिखाता है ।

AI ने बढ़ा दी तांबे के दाम

एक्सिस कैपिटल की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, AI इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती डिमांड ने तांबे की किल्लत बढ़ा दी है। कीमतें बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बूम है। दरअसल, डेटा सेंटर और क्लाउड कंप्यूटिंग के भारी-भरकम हार्डवेयर में वायरिंग और कंपोनेंट्स के लिए तांबे का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। अब AI इंफ्रास्ट्रक्चर और पारंपरिक मैन्युफैक्चरिंग के बीच इसी तांबे को लेकर होड़ मच गई है। सप्लाई टाइट होने से तांबे की कीमतें आसमान पर पहुंच गई हैं।

एल्युमिनियम का सहारा

तांबे की इस रिकॉर्ड तोड़ महंगाई से बचने के लिए इलेक्ट्रॉनिक कंपनियां अब अपने प्रोडक्ट्स की डिजाइन बदल रही हैं। तांबे के मुकाबले एल्युमिनियम सस्ता होने के कारण, मार्जिन बचाने में जुटी कंपनियों के लिए एल्युमिनियम सबसे आकर्षक और आसान विकल्प बन गया है।

एक्सिस कैपिटल की रिपोर्ट बताती है कि फ्रिज और एयर कंडीशनर (AC) जैसे कंज्यूमर ड्युरेबल्स में अब तांबे की जगह एल्युमिनियम को तरजीह दी जा रही है। हालांकि, ऐसा नहीं है कि एल्युमिनियम के दाम नहीं बढ़े हैं। साल-दर-साल के आधार पर एल्युमिनियम भी 28% महंगा हुआ है, जबकि कॉपर 45% महंगा हुआ है।

कंपनियों का कहना है कि तांबा अब इतना महंगा हो चुका है कि कंपनियों के लिए बिना प्रोडक्ट डिजाइन बदले मुनाफा कमाना मुश्किल हो गया है। एल्युमिनियम एक बेहतरीन जुगाड़ साबित हो रहा है। हालांकि बाजार के जानकार इसे सही विकल्प नहीं मान रहे हैं।

तांबा कारोबारियों की बिगड़ी बैलेंस सीट

तांबा की बढ़ती कीमतों का सीधा असर घरेलू कारोबार तांबा कारोबारियों पर पड़ रहा है। इसकी प्रमुख वजह कर्ज देने के बैंक के नियम हैं। भारत मेटल एक्सचेंज के अध्यक्ष सुशील कोठारी कहते हैं कि कीमतें बढ़ने की वजह से कारोबारियों की खरीदारी क्षमता कम हुई है। क्योंकि वह ज्यादा पैसा लगाकर कम माल खरीद पा रहे हैं। जबकि बैंक गोदाम में जमा माल (क्वांटिटी) पर लोन देते हैं , कीमत के आधार पर नहीं। हमने वित्त मंत्री और आरबीआई से इस मुद्दे पर हस्ताक्षेप करने और निमयों में सुधार की मांग की है। ताकि कारोबारियों को उनके मूल्य के आधार पर लोन मिल सके और कारोबार सुचारु रुप से चल सके।

First Published : September 9, 2026 | 3:38 PM IST