हरिद्वार स्थित पतंजलि आयुर्वेद ने शुक्रवार को कहा कि कोरोनिल को अब विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) प्रमाणन योजना के तहत आयुष मंत्रालय से प्रमाण पत्र मिला है। कंपनी ने दावा किया कि यह कोविड-19 का मुकाबला करने वाली पहली साक्ष्य-आधारित दवा है। पतंजलि ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्ष वर्धन और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में यहां आयोजित एक कार्यक्रम में इस दवा की पेशकश की थी।
पतंजलि ने एक बयान में कहा, ‘कोरोनिल को केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन के आयुष खंड से फार्मास्युटिकल प्रोडक्ट (सीओपीपी) का प्रमाण पत्र मिला है।’ सीओपीपी के तहत कोरोनिल को अब 158 देशों में निर्यात किया जा सकता है। इस बारे में स्वामी रामदेव ने कहा कि कोरोनिल प्राकृतिक चिकित्सा के आधार पर सस्ते इलाज के रूप में मानवता की मदद करेगी।
आयुष मंत्रालय ने उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर कोरोनिल टैबलेट को ‘कोविड-19 में सहायक उपाय’ के रूप में मान्यता दी है। पतंजलि ने आयुर्वेद आधारित कोरोनिल को पिछले साल 23 जून को पेश किया था, जब महामारी अपने चरम पर थी। हालांकि, इसे गंभीर आलोचना का सामना करना पड़ा क्योंकि इसके पक्ष में वैज्ञानिक प्रमाणों की कमी थी। इसके बाद आयुष मंत्रालय ने इसे सिर्फ ‘प्रतिरक्षा-वर्धक’ के रूप में मान्यता दी। कोरोनिल का विकास पतंजलि अनुसंधान संस्थान द्वारा किया गया है।
आयुर्वेद अर्थव्यवस्था में 90 फीसदी वृद्धि : डॉ हर्ष वर्धन
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्ष वर्धन ने शुक्रवार को कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद आयुर्वेद अर्थव्यवस्था में 90 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। इसका कारण आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर स्वीकार किया जाना है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में निर्यात के साथ-साथ निवेश में भी भारी वृद्धि हुई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, आयुर्वेद उत्पादों का बाजार 30,000 करोड़ रुपये का है, जिसमें 15 से 20 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर हो रही है। उन्होंने कहा, ‘यह आंकड़ा पूर्व-कोविड समय का है। कोविड बाद के दौर में आयुर्वेद की अर्थव्यवस्था वृद्धि दर बढ़कर 50 से 90 प्रतिशत हो गई है जबकि पहले इसमें 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि हो रही थी।’ यह स्वयं दर्शाता है कि भारत और विश्व के लोगों ने आयुर्वेद को स्वीकार किया है।
मंत्री ने कहा, ‘निर्यात और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के संदर्भ में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है।’ उन्होंने कहा कि कोविड समय के दौरान, आयुष मंत्रालय ने 140 स्थानों पर 109 प्रकार के अध्ययन किए थे। ‘जब मैंने परिणाम देखे, तो वे काफी उत्साहजनक और सकारात्मक थे।’ आयुर्वेद लोगों को स्वस्थ रखने के लिए है और इसे किसी से किसी भी प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा, ‘अगर हम तकनीकी रूप से इसका अध्ययन करते हैं, तो भारत के पास एक बड़ी क्षमता मौजूद है।’