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अनिल अंबानी : धन शोधन जांच के तहत 3,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति कुर्क

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सूत्रों ने बताया कि संघीय जांच एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत 42 संपत्तियों को कुर्क करने के लिए चार अनंतिम आदेश जारी किए थे।

Last Updated- November 03, 2025 | 10:07 PM IST
Anil Ambani

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रिलायंस समूह के चेयरमैन अनिल अंबानी की कंपनियों के खिलाफ धन शोधन जांच के तहत 3,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति कुर्क की है। आधिकारिक सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

सूत्रों ने बताया कि संघीय जांच एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत 42 संपत्तियों को कुर्क करने के लिए चार अनंतिम आदेश जारी किए थे। इन संपत्तियों में अंबानी (66) के परिवार का मुंबई के पाली हिल स्थित घर और उनके समूह की कंपनियों की अन्य आवासीय एवं वाणिज्यिक संपत्तियां शामिल हैं।

दिल्ली में महाराजा रणजीत सिंह मार्ग पर रिलायंस सेंटर के एक भूखंड के अलावा, रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की कई अन्य संपत्तियां, आधार प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड, मोहनबीर हाई-टेक बिल्ड प्राइवेट लिमिटेड, गेम्स इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड, विहान43 रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड (पूर्व में कुंजबिहारी डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम से जानी जाती थी) और कैंपियन प्रॉपर्टीज लिमिटेड की संपत्तियां कुर्क की गई हैं।

ये संपत्तियां राष्ट्रीय राजधानी, नोएडा, गाजियाबाद, मुंबई, पुणे, ठाणे, हैदराबाद, चेन्नई और पूर्वी गोदावरी में स्थित हैं। मुंबई में चर्चगेट की ‘नागिन महल’ बिल्डिंग में ऑफिस, नोएडा में बीएचए मिलेनियम अपार्टमेंट्स और हैदराबाद में कैमस कैप्री अपार्टमेंट्स उन संपत्तियों में से हैं, जिन्हें ईडी ने फिलहाल कुर्क किया है।

सूत्रों के अनुसार, कुर्क की गई संपत्तियों का कुल मूल्य 3,084 करोड़ रुपये है। ईडी की कार्रवाई पर अंबानी या उनके समूह की ओर से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। एजेंसी ने कहा कि अब तक ईडी ने रिलायंस अनिल अंबानी समूह की अलग-अलग कंपनियों द्वारा सरकारी पैसे की ‘धोखाधड़ी’ से हेरफेर किये जाने का पता लगाया है।

ईडी के बयान में कहा गया है कि एजेंसी ने विदेशी मुद्रा विनिमय प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत ‘आर-इंफ्रा’ के खिलाफ एक अलग तलाश अभियान चलाया और पाया कि जयपुर-रींगस हाईवे परियोजना से 40 करोड़ रुपये ‘हड़प लिए गए’ थे। बयान के अनुसार, ‘पैसे सूरत की फर्जी कंपनियों के ज़रिए दुबई भेजे गए। इस जांच में 600 करोड़ रुपये से ज़्यादा का एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाला नेटवर्क सामने आया है।’ भाषा

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First Published - November 3, 2025 | 9:47 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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