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टाटा से टस से मस नहीं हुई अनिल की ‘पावर’

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Last Updated- December 11, 2022 | 12:20 AM IST

अनिल अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस पावर को सासन (मध्य प्रदेश) अल्ट्रा मेगा पावर परियोजना के लिए आबंटित कैप्टिव खान से कोयले को अन्य परियोजनाओं में इस्तेमाल की अनुमति देने के सरकार के फैसले के खिलाफ टाटा पावर की याचिका को सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया।
हालांकि टाटा पावर ने कहा है कि वह इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी। पीठ ने यह पाए जाने के बाद कि याचिका को खारिज कर दिया कि टाटा पावर के पास इस प्रकार की अर्जी देने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है।
फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए रिलायंस पावर के एक अधिकारी ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट का यह फैसला न सिर्फ अधिकार प्राप्त मंत्री समूह (ईजीओएम) के निर्णय पर वैधानिक मुहर लगाता है बल्कि इससे रिलायंस पावर की 4000 वॉट की चित्रांगी परियोजना पर भी आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।
पिछले साल अगस्त में ईजीओएम ने ही सासन के कोयला भंडार का प्रयोग अल्ट्रा मेगा प्रोजेक्ट के अलावा अन्य परियोजनाओं में करने के रिलायंस पावर के अनुरोध को मंजूरी दी थी। कंपनी की योजना सासन में मिलने वाले अतिरिक्त कोयले का उपयोग करने के लिए मध्यप्रदेश के चित्रांगी में ही 4000 मेगावॉट प्रोजेक्ट लगाने की है।
सासन परियोजना के लिए लगी बोली के शुरुआती चरणों में टाटा पावर ने भी शिरकत की थी। इसके बाद इसी साल जनवरी में उसने दिल्ली हाई कोर्ट में ईजीओएम के निर्णय को इस आधार पर चुनौती दी थी कि टेंडर में उल्लिखित नियमों और शर्तों का उल्लंघन किया जा रहा है।
टाटा पावर ने कहा- टाटा पावर ने एक अहम मसला उठाया है, जिसके तहत सरकार ने सासन के कोयला भंडारों के अन्यत्र इस्तेमाल की मंजूरी दी है जबकि रिलायंस पावर को मिले सासन अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट के लिए ही वहां की खदानों से कोयला भंडारों के इस्तेमाल की शर्तों का उल्लेख बोली प्रक्रिया में ही था।

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First Published - April 14, 2009 | 3:23 PM IST

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