अनिल अंबानी भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के साथ चल रहे विवाद में समाधान पेशेवर की नियुक्ति के निर्देश के खिलाफ राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) में अपील कर सकते हैं। इससे पहले शुक्रवार को एनसीएलटी ने दोनों पक्षों के बीच चल रहे विवाद में जितेंद्र कोठारी को समाधान पेशेवर नियुक्त कर दिया था।
अंबानी और एसबीआई के बीच चल रहे इस मामले का तार रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) और रिलायंस इन्फ्राटेल (आरआईटीएल) से जुड़ा है। इन दोनों कंपनियों ने एसबीआई से ऋण लिए थे, जिसके लिए अंबानी ने अपनी निजी गारंटी दी थी। अब इस मामले में समाधान पेशेवर की नियुक्ति के आदेश के खिलाफ अंबानी ने राष्ट्रीय कंपनी अपील विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) जाने का मन बना दिया है। अंबानी इस मसले पर कानूनी सलाह ले रहे हैं। दिवालिया न्यायाधिकरण के आदेश में कहा गया है कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि अनिल अंबानी ने आरकॉम और आरआईटीएल को आवंटित ऋण पर निजी गारंटी दी थी। आदेश में कहा गया है कि दिवालिया एवं ऋण शोधन अक्षमता (आईबीसी) के अनुच्छेद 95 के तहत ऋणदाता द्वारा आवेदन सौंपने के सात दिनों के भीतर समाधान पेशेवर नियुक्त करने के अलावा एनसीएलटी के पास दूसरा कोई विकल्प नहीं रह गया है।
अंबानी का पक्ष रखने वाले वकील ने कहा कि इन कंपनियों के लिए निगमित दिवालिया समाधान प्रक्रिया भी चल रही है और इसके तहत कर्जदाताओं ने योजना पर मुहर भी लगा दी है। वकील ने कहा कि अब केवल न्यायाधिकरण की अनुमति की प्रतीक्षा की जा रही है और कंपनी की समाधान योजना पूरी होने तक एनसीएलटी भी इंतजार कर सकता है। हालांकि एनसीएलटी ने यह दलील स्वीकार नहीं की। दूसरी तरफ अंबानी के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘एनसीएलटी ने एसबीआई के उस आग्रह को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने अंबानी को परिसपंत्ति से जुड़े निर्णय लेने से रोकने की मांग की थी। समाधान पेशेवर नियुक्त करने के एनसीएलटी के आदेश का यह मतलब नहीं है कि एसबीआई का दिवालिया आवेदन स्वीकार हो गया है। समाधान पेशेवर एसबीआई के आवेदन की समीक्षा करेंगे और एनसीएलटी को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।’
इस पूरे मामले पर धीर ऐंड धीर एसोसिएट्स के एसोसिएट पार्टनर आशिष प्यासी ने कहा, ‘प्रक्रिया के अनुसार आवेदन अभी तक स्वीकार नहीं हुआ है। समाधान पेशेवर पहले आवदेन की समीक्षा करेंगे और 10 दिनों के भीतर एनसीएलटी को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे। पेशेवर को अपनी रिपोर्ट में आवेदन स्वीकार या अस्वीकार करने की वजह बतानी होगी, जिस पर एनसीएलटी विचार करेगा। इस बीच, समाधान पेशेवर दोनों पक्षों से जानकारियां मांग सकता है।’
अंबानी ने 2016 में आरकॉम और आरआईटीएल के लिए एसबीआई से कर्ज हासिल करने के लिए अपनी निजी गारंटी दी थी। समझौते की शर्तों के तहत एसबीआई ने आरकॉम और आरआईटीएल को अगस्त 2016 में 1,195 करोड़ रुपये ऋण दिया था। हालांकि दोनों कंपनियां जनवरी 2017 में देनदारी चुकाने में चूक कर गईं, जिसके बाद एसबीआई ने इन कंपनियों को आवंटित ऋण को गैर-निष्पादित खाता (एनपीए) घोषित कर दिया।
इसके बाद एसबीआई ने इस वर्ष मार्च में दिवालिया न्यायाधिकरण में मामला दायर कर दिया।