उद्योग निकाय एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) ने आम बजट 2021 में शामिल कराने के लिए 10 मांगों की सूची सौंपी है। वित्त मंत्रालय को भेजे बजट पूर्व प्रस्ताव में एम्फी ने कहा है कि विभिन्न वित्तीय क्षेत्रों में निवेश के मामले में कर व्यवहार एक समान होना चाहिए, साथ ही खुदरा करदाताओं की मुश्किलें कम की जाए और म्युचुअल फंड में भागीदारी को प्रोत्साहित किए जाने के लिए कदम उठाए जाएं। एम्फी ने म्युचुअल फंडों और यूलिप के बीच कर व्यवहार एक जैसा करने की पुरानी मांग दोहराई है। दोनों ही निवेश वाली योजनाएं हैं और प्रतिभूतियों में निवेश करती हैं।
अभी यूलिप के निवेशकोंं को स्विचिंग पर पूंजीगत लाभ कर नहींं देना होता है, वहीं निकासी पर एसटीटी भी नहीं लगता, साथ ही बीमा फर्मों की यूलिप योजनाओं से निकासी पर आयकर भी नहीं देना होता है, जिसमें जल्दी सरेंडर करना और आंशिक निकासी शामिल है। बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड यानी सेबी ने फरवरी 2014 में प्रकाशित लॉन्ग टर्म पॉलिसी फॉर म्युचुअल फंड्स में कर आर्बिट्रेज को समाप्त करने की जरूरत पर जोर दिया था। एम्फी के नोट में कहा गया है, जीवन बीमा क्षेत्र में उच्च कमीशन व प्रोत्साहन का ढांचा और आकर्षक कर आर्बिट्रेज से यूलिप में आय पर 10.4 फीसदी एलटीसीजी कर से राजस्व का संभावित नुकसान (खास तौर से एचएनआई से) हो सकता है, जो काफी अहम है।