मंदी के कारण जहां कपड़ा निर्यातक कंपनियां घाटे का रोना रो रही हैं, वहीं कपड़ा कारोबार की दिग्गज कंपनी आलोक इंडस्ट्रीज की बिक्री में बढ़ोतरी हुई है।
अमेरिका और यूरोप से आने वाली मांग में कमी आने के कारण निर्यातकों को काफी घाटा हो रहा है। बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए आलोक इंडस्ट्रीज को काम छोटे निर्माताओं को आउटसोर्स करना पड़ रहा है।
चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में कंपनी को लगभग 1,241 करोड़ रुपये के ऑर्डर मिले हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपड़े की मांग में कमी आ रही है, लेकिन इसके बाद भी कंपनी को मिलने वाले ऑर्डरों में 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। कंपनी को दूसरी छमाही में भी कुछ इसी तरह का कारोबार करने की उम्मीद है।
चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में कंपनी के निर्यात में 18 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। आलोक इंडस्ट्रीज के मुख्य वित्त अधिकारी सुनील खंडेलवाल ने बताया, ‘लागत कम करने के लिए वॉलमार्ट और टार्गेट जैसी अंतरराष्ट्रीय रिटेल कंपनियां अपने आपूर्तिकर्ताओं की संख्या कम से कम रखना चाहती हैं।’ उन्होंने बताया कि आने वाले 4-5 महीनों के लिए कं पनी के पास 400-500 करोड़ रुपये के ऑर्डर पहले से ही है।
तीन साल पहले विस्तार शुरू करने वाली आलोक इंडस्ट्रीज अपने विस्तार के चौथे चरण में है। कंपनी को उम्मीद है कि इस साल के अंत तक कंपनी का विस्तार कार्य पूरा हो जाएगा।
खंडेलवाल ने कहा, ‘हमारे पास इस समय बड़े ऑर्डर हैं इसीलिए हम कु छ काम तिरुपुर की एक कंपनी को आउटसोर्स कर रहे हैं। इस कंपनी की उत्पादन क्षमता एक दिन में 2,000 कपड़े बनाने की है।’
वित्त वर्ष 2008 में कंपनी की कुल कीमत 1,431 करोड़ रुपये थी, जो चालू वित्त वर्ष में 1,956 करोड़ रुपये होने की संभावना है।