केंद्रीय सतर्कता आयोग ने एयरटेल की ओर से लंबी दूरी की कॉल दर में हेरफेर करके केंद्र सरकार को करीब 100 करोड़ रुपये का चूना लगाए जाने के मामले में दूरसंचार विभाग के अधिकारियों की संभावित मिलीभगत की जांच के आदेश दिए हैं।
आयोग ने यह आदेश सांसद अजय चक्रवर्ती की शिकायत पर जारी किया है। चक्रवर्ती के मुताबिक, लंबी दूरी की राष्ट्रीय सेवाओं के खाते में ज्यादा और मोबाइल सेवाओं के खाते में कम राजस्व दिखाने के लिए एयरटेल ने 2008 में अपनी लंबी दूरी की कॉल दर को 25 पैसे से बढ़ाकर 55 पैसे कर दिया।
चक्रवर्ती ने अपने पत्र में सतर्कता आयोग को लिखा है कि भारती के इस हेरफेर से सरकार को हर महीने 8.3 करोड़ रुपये हर महीने का नुकसान हुआ। इस तरह, पिछले साल भर में सरकार कुल 100 करोड़ रुपये की कमाई से हाथ धो बैठी। चक्रवर्ती के मुताबिक, इस वजह से उपभोक्ताओं के लिए एसटीडी कॉल काफी महंगी हो गई।
उनका आरोप है कि पूरे प्रकरण पर दूरसंचार विभाग और भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण, ट्राई ने अपनी आंखें बंद रखी हैं। ऐसे में उन्होंने आयोग से इस पूरे मामले की जांच की मांग की है। गौरतलब है कि ट्राई ने पिछले साल भारती एयरटेल की लंबी दूरी के राजस्व खाते में जबरदस्त तेजी का उल्लेख किया था।
दरअसल, मौजूदा नियम के तहत, लंबी दूरी की काल दरों पर महज 6 फीसदी का लाइसेंस शुल्क सरकार को देना होता है, वहीं मोबाइल सेवाओं के मामले में यह शुल्क 10 फीसदी है। तो चक्रवर्ती का आरोप है कि लाइसेंस शुल्क बचाने की खातिर ही एयरटेल ने यह हेराफेरी की है। इस हेराफेरी से एयरटेल ने जितनी राशि कर ने देकर बचाई, उतनी ही राशि का चूना कंपनी ने सरकार को लगाया।
दूरसंचार विभाग ने हालांकि इस मामले में पहले ही भारती एयरटेल के खातों की विशेष ऑडिटिंग के आदेश दे रखे हैं। इस तरह की जांच पहले आरकॉम की भी हो चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय सतर्कता आयोग भारती पर लगे अनियमितता के इस आरोप की जांच जल्द ही पूरी करेगा। आयोग ने इस मामले की रिपोर्ट जून 2009 तक मांगी है।
इस मामले पर आयोग के एक अधिकारी ने कहा, ”इस मामले के जांच के आदेश दे दिए गए हैं। हालांकि अब तक किसी अधिकारी के खिलाफ कोई मामला दायर नहीं किया गया है। जांच की रिपोर्ट जब आ जाएगी तभी कोई कार्रवाई की जाएगी।” भारती एयरटेल ने इस मामले पर कोई भी प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया।