कोरोनावायरस की दूसरी लहर के प्रभाव की वजह से एयर इंडिया और बीपीसीएल जैसे सरकार के प्रमुख उपक्रमों के विनिवेश के लिए समय-सीमा दो-तीन महीने तक आगे बढ़ाई जा सकती है।
हालांकि सरकार को वित्त वर्ष 2022 तक दो कंपनियों की बिक्री पूरी होने और प्रमुख एवं गैर-प्रमुख पीएसयू क्षेत्रों में सरकारी हिस्सेदारी की बिक्री के जरिये 1,75,000 रुपये का विनिवेश लक्ष्य हासिल होने की उम्मीद है।
एक सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘तिमाही आधार पर विनिवेश को लेकर अल्पावधि लक्ष्यों में कुछ समस्या देखी जा सकती है, लेकिन सालाना विनिवेश लक्ष्य में किसी तरह का बदलाव नहीं किा गया है।’
अधिकारियों का कहना है कि एयर इंडिया की बिक्री के लिए चुने गए बोलीदाताओं ने सरकार से वित्तीय बोलियों की समय-सीमा आगे बढ़ाने को कहा है, क्योंकि उन्हें संबद्घ स्थानों के आकलन को लेकर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
भारत में महामारी की दूसरी लहर की वजह से कई देशों ने इस वायरस के प्रसार से बचने के प्रयास में भारत के लिए उड़ानें बंद कर दी हैं। इससे बैंकरों और वकीलों की यात्राएं प्रभावित हो रही हैं क्योंकि वे उड़ानें बंद होने की वजह से यात्रा करने में सक्षम नहीं हो रहे हैं।
सरकार ने एयर इंडिया की बिक्री के लिए वित्तीय बोलियां आमंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू की है और इस संबंध में सौदा इस साल सितंबर तक पूरा हो जाने की संभावना है।
टाटा समूह भी उन कई कंपनियों में शामिल था जिन्होंने नुकसान में चल रही इस एयरलाइन को खरीदने के लिए पिछले साल दिसंबर में बोलियां लगाई थीं।
सरकार एयर इंडिया और उसकी सहायक इकाई एयर इंडिया एक्सप्रेस में अपनी पूरी 100 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रही है। एयर इंडिया एक्सप्रेस भी 2007 में घरेलू ऑपरेटर इंडियन एयरलाइंस के साथ अपने विलय के बाद से ही नुकसान में रही है।
बीपीसीएल की विनिवेश प्रक्रिया नुमालीगढ़ रिफाइनरी की बिक्री पूरी होने से आगे बढ़ी है। वित्तीय बोलियों के लिए जल्द ही इच्छुक पक्षों को आमंत्रित किए जाने की संभावना है। इसी तरह की स्थिति शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के संदर्भ में है। हालांकि इस संबंध में अधिकारी ने यह नहीं बताया कि यह बिक्री प्रक्रिया कम होगी। 2020 में इनमें से कई महत्त्वपूर्ण बिक्री सौदे (शिपिंग कॉरपोरशन समेत) देशव्यापी लॉकडाउन की वजह से अधर में लटक गए थे।