अदाणी एयरपोट्र्स अपने हवाई अड्डा कारोबार को मुंबई और अहमदाबाद के आसपास केंद्रित करने की योजना बना रही है। कंपनी इन हवाई अड्डों को अपने पोर्टफोलियो में शामिल अन्य हवाई अड्डों के लिए गेटवे के तौर पर विकसित करेगी। लॉजिस्टिक, परिवहन, यूटिलिटी एवं ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने वाले अहमदाबाद का यह समूह अपने हवाई अड्डा कारोबार में अगले पांच वर्षों के दौरान 35,000 करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी कर रहा है। समूह के कुल 50,000 करोड़ रुपये के पूंजीगत खर्च में इसकी अहम हिस्सेदारी होगी।
बैंक ऑफ अमेरिका के साथ एक निवेशक बैठक में कंपनी द्वारा दी गई प्रस्तुति के अनुसार, मुंबई और अहमदाबाद के गेटवे हवाई अड्डों को लखनऊ, गुवाहाटी, त्रिवेंद्रम, जयपुर और मंगलूरु के फीडर हवाई अड्डों के साथ जोड़ा जाएगा। उस प्रस्तुति को बिजनेस स्टैंडर्ड ने भी देखी है। उसमें कहा गया है, ‘गेटवे हवाई अड्डे क्षेत्रीय पहुंच बनाने का अवसर प्रदान करते हैं। ऑफ-पीक सीजन के दौरान गेटवे परिचालन को बढ़ाने के लिए मार्गों का प्रबंधन किया जाएगा ताकि मौजूदा एकाधिकार को तोड़ा जा सके और उपभोक्ताओं तक पहुंच बढ़ाई जा सके।’
अंतरराष्ट्रीय परिचालन के लिहाज से कंपनी छोटे हवाई अड्डों से फीडर ट्रैफिक के साथ अपने गेटवे हवाई अड्डों के जरिये पश्चिम एशिया, यूरोप और सुदूर पूर्व के लिए मार्ग विकसित करना चाहती है। विदेशी संस्थागत निवेशकों के साथ बातचीत में कंपनी ने निजीकरण के आगामी दौर में छह हवाई अड्डों के लिए बोली लगाने की इच्छा भी जताई है।
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) अप्रैल में 6 से 10 हवाई अड्डों के साथ निजीकरण का तीसरा दौर शुरू करेगा। इसके तहत जिन छह हवाई अड्डों को बिक्री के लिए रखा जाएगा उनमें अमृतसर, इंदौर, वाराणसी, रायपुर, त्रिची और भुवनेश्वर के हवाई अड्डे शामिल हैं। निजीकरण के पिछले दौर में कंपनी ने छोटे हवाई अड्डों के लिए आक्रामक बोली लगाकर उद्योग को अचंभित कर दिया था।
मंगलूरु के लिए 115 रुपये प्रति यात्री और लखनऊ के लिए 171 रुपये प्रति यात्री की बोली के साथ अदाणी समूह की बोलियां जीएमआर समूह और पीएनसी इन्फ्राटेक की बोलियों के मुकाबले करीब 500 फीसदी अधिक थीं। इसी प्रकार अडानी समूह ने अहमदाबाद हवाई अड्डे के लिए 177 रुपये प्रति यात्री की बोली लगाई जो ऑटोस्ट्रेड इंडियन इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की तुलना में लगभग 200 फीसदी अधिक है। कंपनी ने कहा, ‘अदाणी एयरपोट्र्स हवाई अड्डा क्षेत्र में वर्चस्व हासिल करना और वह 30 करोड़ ग्राहकों तक पहुंचना चाहती है जिसमें फ्लायर्स और नॉन-फ्लायर्स दोनों शामिल होंगे।’
हब-ऐंड-स्पोक मॉडल की यह रणनीति बंदरगाह एवं सड़क क्षेत्र में कंपनी की अन्य बुनियादी ढांचा परिसंपत्तियों के बीच तालमेल को बेहतर करेगी। इसके जरिये कंपनी एक एकीकृत कार्गो परिवहन मॉडल विकसित करना चाहती है। अदाणी समूह के चेयरमैन एवं प्रवर्तक गौतम अदाणी ने पहले कहा, ‘हम अपने हवाई अड्डा पोर्टफोलियो को हब-ऐंड-स्पोक मॉडल के तहत टियर-1, टियर-2 और टियर-3 शहरों को एकीकृत करने के लिहाज से काफी महत्त्वपूर्ण मानते हैं।’
वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ‘एयरपोर्ट विलेजेज’ को विकसित करते हुए गैर-हवाई राजस्व बढ़ाने की योजना बना रही है। कंपनी ने अपने शेयरधारकों को आश्वस्त किया कि वह भारत में अग्रणी हवाई अड्डा ऑपरेटर बनने के लिए अच्छी स्थिति में है। कंपनी को इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए घरेलू हवाई यातायात में वृद्धि से मदद मिलेगी।
कंपनी पर नजर रखने वाले विश्लेषकों ने कहा कि मुंबई अंतरराष्ट्रीय अवाई अड्डे (मायल) ने अदाणी के हवाई अड्डा कारोबार को एक नया आयाम दिया है। इससे कंपनी को एकल कारोबार को तेजी से मजबूत करने और अंतत: उसे अलग करने में मदद मिलेगी।
एक विश्लेषक ने कहा, ‘मुंबई अवाई अड्डे के बिना छोटे हवाई अड्डों से कमाई करना कंपनी के लिए मुश्किल होता। लेकिन मुंबई और नवी मुंबई हवाई अड्डे से अदाणी के हवाई अड्डा कारोबार को तेजी से लाभप्रद बनाने में मदद मिलेगी। हम उम्मीद करते हैं कि अदाणी समूह अगले दो वर्षों के दौरान अपने हवाई अड्डा कारोबार को एक अलग करेगा और उसे सूचीबद्ध कराएगा।’