प्रतीकात्मक तस्वीर
बड़ी तादाद में महारत्न और नवरत्न कंपनियां कई कॉरपोरेट प्रशासन मानदंडों के अनुपालन में पिछड़ गई हैं। इनमें स्वतंत्र निदेशकों की न्यूनतम संख्या, महिला निदेशक, उत्तराधिकार योजना, शेयरधारक संतुष्टि सर्वेक्षण का अभाव आदि शामिल हैं। एक्सीलेंस एनेबलर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा महारत्न और नवरत्न कंपनियों पर केंद्रित पांचवें वार्षिक कॉरपोरेट प्रशासन सर्वेक्षण से पता चला है कि वित्त वर्ष 2025 के दौरान ऐसी 36 कंपनियों में न्यूनतम रूप से जरूरी संख्या में स्वतंत्र निदेशक नहीं थे। साथ ही 17 कंपनियों के बोर्ड में एक भी महिला निदेशक नहीं थी।
कंपनी अधिनियम, 2013 में ऐसा प्रावधान किया गया है कि हर सूचीबद्ध कंपनी में निदेशकों की कुल संख्या के कम से कम एक तिहाई स्वतंत्र निदेशक होने चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार बोर्ड में कम से कम एक महिला सदस्य की मौजूदगी को अनिवार्य किया गया है, लेकिन महिला अधिकारियों को बोर्ड पदों पर पदोन्नत दिए जाने के संबंध में कोई प्रावधान नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘ऐसा तभी हो सकता है जब संगठन में पर्याप्त संख्या में महिलाओं को उचित पदोन्नति दी जाए।’
रिपोर्ट में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2022 से ही नामित निदेशकों और कार्यकारी निदेशकों को सिटिंग फीस का भुगतान नहीं किया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ये निदेशक स्टॉक ऑप्शंस के हकदार नहीं हैं, इसलिए इन्हें केवल सिटिंग फीस और लाभ से जुड़े कमीशन के जरिये पारिश्रमिक दी जा सकती है। अध्ययन में इन कंपनियों के वार्षिक रिपोर्ट, स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारियों और वेबसाइट पर किए गए खुलासे पर भरोसा किया गया है ताकि उन मानदंडों को परखा जा सके जो निगम प्रशासन मानकों को प्रभावित करते हैं।
अध्ययन में पाया गया कि 21 कंपनियों ने वित्त वर्ष 2022 से वित्त वर्ष 2025 तक पिछले चार वित्त वर्षों के दौरान उत्तराधिकार योजना से संबंधित कोई खुलासा नहीं किया है। सेबी एलओडीआर (सूचीबद्धता दायित्व एवं खुलासा आवश्यकताएं) विनियम, 2015 के अनुसार, सूचीबद्ध कंपनी का निदेशक मंडल सुनिश्चित करेगा कि उसके यहां निदेशक मंडल और वरिष्ठ प्रबंधन की नियुक्ति के लिए एक उत्तराधिकार योजना हो।
अध्ययन में वार्षिक आम बैठक (एजीएम) आयोजित करने के लिए एक हाइब्रिड मॉडल का समर्थन किया गया है ताकि व्यक्तिगत संवाद को बढ़ावा दिया जा सके। रिपोर्ट में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2025 में 36 कंपनियों ने वर्चुअल माध्यम से और महज 3 कंपनियों ने भौतिक तौर पर वार्षिक आम बैठकों का आयोजन किया। यह मोटे तौर पर पिछले चार वर्षों के रुझान के अनुरूप है।
वित्त वर्ष 2025 के दौरान बोर्ड बैठकों में 7 निदेशकों की शून्य उपस्थिति रही। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि ऐसे निदेशकों की फिर नियुक्ति न किए जाने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
सर्वेक्षण में शामिल 40 महारत्न एवं नवरत्न कंपनियों में से 32 बाजार नियामक सेबी के उन नियमों का अनुपालन करने में विफल रहीं जिनमें सूचीबद्ध संस्थाओं को 2022 से 2025 तक के वित्त वर्षों के लिए कंपनी सचिव द्वारा तैयार अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करना आवश्यक बताया गया है। मगर 4 गैर-सूचीबद्ध कंपनियों पर ये प्रावधान लागू नहीं होते हैं।