कैलेंडर वर्ष 2021 में 10 मई तक वैश्विक प्राथमिक बाजार में कंपनियों ने 670 आरंभिक सार्वजनिक निर्गम के जरिए कुल मिलाकर 140.3 अरब डॉलर जुटाए। वित्तीय बाजार के वैश्विक आंकड़े मुहैया कराने वाली रीफ्निटिव की हालिया रिपोर्ट में ये बातें कही गई है। यह रकम कैलेंडर वर्ष 2020 में जुटाई गई रकम के मुकाबले करीब चार गुना है।
रीफ्निटिव के आंकड़ों के मुताबिक, एक्सचेंजों के लिहाज से बीएसई का स्थान वैश्विक स्तर पर 13वां है और कैलेंडर वर्ष 2021 में 26 आईपीओ के जरिए 273.17 करोड़ डॉलर जुटाए गए। इसकी तुलना में कैलेंडर वर्ष 2020 में 11 आईपीओ पेश हुए थे और उसके जरिए 117.29 करोड़ डॉलर जुटाए गए थे। कैलेंडर वर्ष 2021 के पहले पांच महीने में 670 आईपीओ की पेशकश दो दशक का सर्वोच्च आंकड़ा है। कैलेंडर वर्ष 2000 में वैश्विक स्तर पर 667 आईपीओ पेश हुए थे और इसके जरिए 82.3 अरब डॉलर जुटाए गए थे। हालांकि कैलेंडर वर्ष 2021 में अब तक जुटाई गई रकम साल 2007 में 503 आईपीओ के जरिए जुटाई गई रकम 91.8 अरब डॉलर के मुकाबले दूसरा सर्वोच्च आंकड़ा है। रीफ्निटिव के आंकड़ों से यह जानकारी मिली।
आईपीओ में तेजी स्पेशल पर्पज एक्विजिशन कंपनी (एसपीएसी) की सूचीबद्धता के साथ देखने को मिल रही है, जिसके जरिए कैलेंडर वर्ष 21 में अतिरिक्त 97.6 अरब डॉलर जुटाए गए।
लोकप्रियता के लिहाज से नैसडेक का स्थान पहला रहा और आईपीओ और सौदे की संख्या, दोनों लिहाज से यह पसंदीदा गंतव्य रहा। उसके बाद न्यू यॉर्क, हॉन्ग कॉन्ग, लंदन और शांघाई का स्थान रहा। कैलेंडर वर्ष 2021 के हर पांच आईपीओ में से एक तकनीकी क्षेत्र का रहा है और इस साल नई सूचीबद्धता का योगदान कुल जुटाई गई रकम में 27 फीसदी रहा।
रिपोर्ट मेंं कहा गया है, 2021 के दौरान नैसडेक में रिकॉर्ड 33.9 अरब डॉलर जुटाए गए, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले पांच गुने से ज्यादा और 1970 के बाद से इस साल अब तक के लिहाज से सबसे बड़ा आंकड़ा है। 2021 के दौरान कुल 105 नई सूचीबद्धता रिकॉर्ड की गई, जो पिछले साल के मुकाबले 300 फीसदी ज्यादा है और 21 साल पहले डॉट-कॉम में आई तेजी के दौरान बने रिकॉर्ड से भी ज्यादा है।
भारत सरकार के 1.75 लाख करोड़ रुपये के महत्वाकांक्षी विनिवेश लक्ष्य को देखते हुए ज्यादातर विश्लेषक भारतीय प्राथमिक बाजार शानदार रहने की उम्मीद कर रहे हैं। इस विनिवेश में भारतीय जीवन बीमा निगम की हिस्सेदारी बिक्री की योजना शामिल है।
आईआईएफएल सिक्योरिटीज के चेयरमैन आर वेंकटरामन ने कहा, आईपीओ के जरिये इक्विटी जुटाने का यह एक और अहम साल हो सकता है। हम काफी लेनदेन क्रियान्वयन के चरण में देख रहे हैं। भारत की आर्थिक रफ्तार तेज होने से हम अच्छे प्रवर्तकों को पूंजी बाजार में उतरते देखेंगे।
हालांकि बाजार की अनिश्चित स्थिति आईपीओ व प्राथमिक बाजार की कई गतिविधियों को इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही की ओर धकेल सकता है, जिसमें सरकार की तरफ से चुनिंदा एंटरप्राइजेज की हिस्सेदारी बिक्री शामिल है। विश्लेषकों का ऐसा मानना है।
इक्विनॉमिक्स रिसर्च के संस्थापक व मुख्य निवेश अधिकारी जी चोकालिंगम ने कहा, प्रवर्तक व खुदरा निवेशक कोविड संक्रमण की दर नीचे आने और शेयर बाजारों के स्थिर होने तक देखो व इंतजार करो की रणनीति अपना सकते हैं। यह आईपीओ की गतिविधियों को साल के दूसरे हिस्से में धकेल सकता है। आईपीओ की सफलता के लिए आकर्षक कीमत के अलावा स्थिर बाजार जरूरी होता है।
भारत केंद्रित ऑफशोर फंड, ईटीएफ से निकासी
भारत केंद्रित ऑफशोर फंड और एक्सचेंज ट्रेडेट फंड (ईटीएफ) से मार्च 2021 में खत्म हुई तिमाही के दौरान 37.6 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी हुई है। मॉर्निंगस्टार की बुधवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक यह लगातार 12वीं तिमाही है, जब इन फंडों से निकासी हुई। हालांकि, दिसंबर 2020 तिमाही में 98.6 करोड़ डॉलर की निकासी की गई थी, उसके मुकाबले मार्च 2021 तिमाही का आंकड़ा काफी कम है। विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय इक्विटी बाजार में निवेश करने के प्रमुख साधनों में ऑफशोर फंड और ईटीएफ शामिल हैं। मार्च 2021 तिमाही के दौरान ऑफशोर फंड से 1.1 अरब डॉलर की निकासी की गई, जबकि इससे पिछली तिमाही में यह आंकड़ा 1.9 अरब डॉलर था। इस श्रेणी में जहां जनवरी और फरवरी में शुद्ध निकासी हुई वहीं मार्च में इसमें 3.32 करोड़ डॉलर का शुद्ध प्रवाह हुआ। भाषा