facebookmetapixel
Advertisement
एक महीने में 9.6% चढ़ा सोना: क्या इस समय निवेश करना सही या इंतजार करना होगा बेहतर?भारत का विदेशी मुद्रा भंडार नए रिकॉर्ड स्तर पर, $729.328 अरब के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंचाजुलाई में नए मोबाइल ग्राहक जोड़ने में एयरटेल ने मारी बाजी, जियो को पछाड़कर बनी नंबर-1 कंपनीसरकार ने डिफेंस एक्सपोर्ट के नियम किए आसान, MSME के लिए खुलेंगे ग्लोबल बाजारचीनी के दाम पर सरकार की सख्ती, सितंबर से हर 15 दिन में मिलेगा मिलों को बिक्री कोटा; सप्लाई पर भी नजरजियो प्लेटफॉर्म्स IPO को लेकर बड़ा अपडेट! सेबी से मिली मंजूरी, 5 अन्य इश्यू को भी दिखाई हरी झंडीदेश के औद्योगिक उत्पादन की रफ्तार पड़ी धीमी, जून के 8.8% के मुकाबले जुलाई में दर्ज हुई 6.7% की ग्रोथऐप से लोन लेने का सोच रहे हैं? पहले जांच लें ये जरूरी चीजें, वरना खाली हो सकता है आपका बैंक अकाउंटनेपाल में दोबारा विनाशकारी बाढ़ का खतरा! उपग्रह तस्वीरों में दिखी 20.25 हेक्टेयर की नई झीलनौकरी छोड़ते ही खत्म हो जाएगा आपका कॉर्पोरेट हेल्थ इंश्योरेंस? इस्तीफे से पहले समझ लें ये बेहद जरूरी बातें

चीनी के दाम पर सरकार की सख्ती, सितंबर से हर 15 दिन में मिलेगा मिलों को बिक्री कोटा; सप्लाई पर भी नजर

Advertisement

खाद्य मंत्रालय के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में चीनी के एक्स-मिल दाम करीब 20 फीसदी तक नीचे आए हैं। इसके बाद खुदरा बाजार में भी कीमतों में नरमी शुरू हो गई है

Last Updated- August 28, 2026 | 5:20 PM IST
Sugar
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

देश में चीनी की बढ़ती कीमतों को काबू में करने के लिए केंद्र सरकार ने सप्लाई व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। अब सितंबर से चीनी मिलों को हर महीने की जगह 15-15 दिन के हिसाब से बिक्री का कोटा दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे बाजार में चीनी की सप्लाई पर नजर रखना आसान होगा और किसी तरह की कमी पैदा होने से रोकी जा सकेगी।

खाद्य मंत्रालय के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में चीनी के एक्स-मिल दाम करीब 20 फीसदी तक कम हुए हैं। इसका असर अब खुदरा बाजार में भी दिखने लगा है और कीमतों में नरमी आ रही है। मंत्रालय ने साफ कहा है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है। इसलिए लोगों को घबराकर ज्यादा चीनी खरीदने या जरूरत से ज्यादा स्टॉक रखने की जरूरत नहीं है।

मिलों को बिक्री के 7 दिन के अंदर चीनी भेजनी होगी

अभी तक सरकार चीनी मिलों को हर महीने के हिसाब से बिक्री का कोटा देती थी। जांच में पता चला कि कुछ मिलों के पास घोषित स्टॉक से ज्यादा चीनी मौजूद थी। वहीं, कुछ मिलों ने उन्हें मिले मासिक कोटे के मुकाबले कम चीनी बेची।

सरकार को यह भी पता चला कि कई मामलों में महीने की शुरुआत में चीनी बेच दी गई, लेकिन खरीदारों ने उसे मिल से महीने के आखिरी दिनों में उठाया। मंत्रालय के मुताबिक, इसकी वजह से कुछ समय के लिए बाजार में चीनी की सप्लाई कम दिखाई दी और कमी जैसी स्थिति बन गई।

अब नई व्यवस्था के तहत मिलों को दिए गए कोटे का कम से कम 40 फीसदी हिस्सा पहले हफ्ते में बेचना होगा। बची हुई मात्रा अगले हफ्ते में बेचनी होगी। सरकार का मानना है कि इससे मांग और सप्लाई की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सकेगी। बाजार में कोई बदलाव होने पर सरकार भी जल्दी कदम उठा सकेगी।

इसके अलावा, चीनी मिलों को बिक्री के बाद 7 दिन के अंदर चीनी की डिस्पैच करनी होगी। सरकार के मुताबिक, इन दोनों बदलावों से सप्लाई चेन में होने वाली अनावश्यक देरी कम होगी और बाजार में चीनी की सप्लाई बेहतर बनी रहेगी।

Also Read: बिहार में मशरूम उत्पादन करीब सात गुना बढ़ा, ओडिशा और महाराष्ट्र भी बने प्रमुख राज्य

चीनी की कीमतें काबू में करने के लिए सरकार के कई कदम

चीनी के दाम नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार पहले ही कई कदम उठा चुकी है। सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी है। इसके अलावा डीलरों और बड़े खरीदारों, जैसे पेय पदार्थ बनाने वाली कंपनियों, के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा भी तय की गई है। वहीं, चीनी के निर्यात पर कुछ महीने पहले ही रोक लगाई जा चुकी है।

खाद्य मंत्रालय के मुताबिक, इन कदमों के बाद चीनी की एक्स-मिल कीमतों में करीब 20 फीसदी की गिरावट आई है। मंत्रालय को उम्मीद है कि सप्लाई चेन के सामान्य तरीके से काम करने पर इसका असर खुदरा बाजार तक भी पहुंचेगा। इससे आने वाले समय में दुकानों पर चीनी के दाम और कम हो सकते हैं।

सरकार ने देशभर की चीनी मिलों में स्टॉक की फिजिकल जांच भी कराई। जांच के दौरान कई मिलों में घोषित मात्रा से ज्यादा चीनी मिली। कुछ मिलों पर आवंटित कोटे से कम चीनी बेचने यानी शॉर्ट सेलिंग का मामला भी सामने आया। सरकार के मुताबिक, पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद इस तरह की गतिविधियों से बाजार में चीनी की उपलब्धता कम हो सकती है। मंत्रालय ने बड़े थोक खरीदारों से भी कहा है कि वे अपनी जरूरत से ज्यादा चीनी का स्टॉक न रखें।

अक्टूबर से बाजार में बढ़ेगी चीनी की सप्लाई

2026-27 मार्केटिंग ईयर अक्टूबर से शुरू होगा। सरकार के मुताबिक, नए सीजन में गन्ने की पेराई 15 अक्टूबर से शुरू होगी। अक्टूबर के दौरान 10 लाख टन से ज्यादा चीनी बनने की उम्मीद है। मिलों को अक्टूबर में तैयार होने वाली चीनी को बिना किसी प्रतिबंध के बेचने की अनुमति दी गई है। इसका मकसद नए सीजन में बनने वाली चीनी को जल्द से जल्द घरेलू बाजार तक पहुंचाना है। नवंबर में करीब 45 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान है। इससे घरेलू खपत के लिए बाजार में अतिरिक्त चीनी उपलब्ध होगी।

उद्योग संगठन ISMA के मुताबिक, 2025-26 मार्केटिंग ईयर में एथनॉल के लिए डायवर्जन के बाद देश का शुद्ध चीनी उत्पादन करीब 279 लाख टन रहने का अनुमान है। इस मार्केटिंग ईयर की शुरुआत में करीब 50 लाख टन चीनी का स्टॉक मौजूद था।

देश में सालाना घरेलू चीनी की मांग 280-285 लाख टन रहने का अनुमान है। वहीं, सरकार द्वारा निर्यात पर रोक लगाए जाने से पहले करीब 8 लाख टन चीनी का निर्यात हुआ था।

ISMA ने सितंबर के अंत तक करीब 35 लाख टन क्लोजिंग स्टॉक रहने का अनुमान लगाया है। संगठन के मुताबिक, इस साल कुल 309 लाख टन सकल चीनी उत्पादन होने का अनुमान है। इसमें से करीब 30 लाख टन चीनी एथनॉल उत्पादन के लिए डायवर्ट होने की उम्मीद है।

खराब मौसम और कीटों के कारण गन्ने की फसल प्रभावित हुई है। इसके बाद ISMA ने पहले लगाए गए 345 लाख टन के सकल चीनी उत्पादन के अनुमान को घटा दिया था।

Advertisement
First Published - August 28, 2026 | 5:05 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement