आजकल स्मार्टफोन पर एक क्लिक में लोन मिल जाता है। अचानक पैसों की जरूरत हो या कोई इमरजेंसी, लोग तुरंत लोन देने वाले ऐप्स का सहारा लेते हैं। लेकिन यह सुविधा कई बार मुसीबत बन सकती है। बाजार में कई फर्जी लोन ऐप हैं, जो लोगों को फंसाकर भारी ब्याज और दूसरे चार्ज वसूलते हैं। ये ऐप फोन से निजी जानकारी चुराकर परेशान और ब्लैकमेल भी कर सकते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसलिए किसी भी लोन ऐप से कर्ज लेने से पहले उसकी अच्छी तरह जांच करना जरूरी है।
किसी भी डिजिटल लोन ऐप को डाउनलोड करने से पहले यह देखना जरूरी है कि उसके पीछे कौन सी आर्थिक संस्था है। मणिपाल फिनटेक की CEO पूजा अभिषेक सिंह के मुताबिक, यह जरूर जांचें कि ऐप किसी बैंक या भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से रजिस्टर्ड NBFC से जुड़ा है या नहीं। साथ ही, ऐप की प्राइवेसी पॉलिसी, ब्याज दर और दूसरे चार्ज ध्यान से जरूर पढ़ें। ऐप हमेशा गूगल प्ले स्टोर या ऐपल ऐप स्टोर जैसे भरोसेमंद प्लेटफॉर्म से ही डाउनलोड करें।
Biz2X और Biz2Credit के CEO और को-फाउंडर रोहित अरोड़ा कहते हैं कि असली लेंडर अपनी पहचान नहीं छिपाते। इसलिए ऐप स्टोर पर डेवलपर का नाम, कंपनी का आधिकारिक पता और कस्टमर केयर नंबर जरूर देखें। लोन लेने से पहले एग्रीमेंट को ध्यान से पढ़ें। अगर कोई ऐप आपको जानकारी पढ़ने का मौका नहीं देता या जल्दी लोन लेने का दबाव बनाता है, तो सावधान हो जाएं।
Also Read: हर महीने ₹20,500 की कमाई! सीनियर सिटीजन इस स्कीम का उठा सकते हैं लाभ, पूरा कैलकुलेशन यहां देखें
कई फर्जी ऐप खुद को RBI से रजिस्टर्ड बताते हैं। लेकिन सिर्फ ऐप पर लिखी बातों के भरोसे नहीं रहना चाहिए। रोहित अरोड़ा के मुताबिक, RBI के नियमों के तहत सभी रजिस्टर्ड बैंक और NBFC को अपने लेंडिंग सर्विस प्रोवाइडर्स (LSP) और उनसे जुड़े ऐप्स की जानकारी देनी होती है। ग्राहक बैंक या NBFC की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर चेक कर सकते हैं कि ऐप उनके साथ जुड़ा है या नहीं।
RBI की वेबसाइट पर रजिस्टर्ड NBFC की लिस्ट भी मौजूद रहती है। अगर ऐप का किसी रजिस्टर्ड बैंक या NBFC से संबंध नहीं मिलता है, तो उससे लोन लेने से बचें।
पूजा अभिषेक सिंह भी सलाह देती हैं कि ऐप पर दी गई जानकारी को लेंडर की आधिकारिक वेबसाइट से मिलाकर जरूर देखें। यह छोटी सी जांच आपको बड़े आर्थिक नुकसान से बचा सकती है।
दोनों एक्सपर्ट का कहना है कि फर्जी लोन ऐप अक्सर ऐसे ऑफर देते हैं, जो पहली नजर में काफी अच्छे लगते हैं। जैसे- ‘बिना कागजी कार्रवाई लोन’, ‘बिना क्रेडिट स्कोर लोन’, ‘तुरंत अप्रूवल’ या ‘बहुत कम ब्याज’। ऐसे दावों से सावधान रहें।
रोहित अरोड़ा के मुताबिक, कोई भी असली आर्थिक संस्था लोन देने से पहले KYC और जरूरी जांच करती है। अगर कोई ऐप बिना किसी जांच के तुरंत लोन देने का दावा करता है, तो सावधान हो जाएं। ऐसे ऐप आपका निजी डेटा चुराने के लिए भी हो सकते हैं।
सबसे बड़ा खतरा तब होता है, जब ऐप आपके फोन के कॉन्टैक्ट, कॉल लॉग, फोटो या SMS का एक्सेस मांगता है। लोन देने के लिए किसी संस्था को आपकी कॉन्टैक्ट लिस्ट या कॉल हिस्ट्री की जरूरत नहीं होती।
रोहित अरोड़ा बताते हैं कि फर्जी ऐप इस डेटा का इस्तेमाल आपको परेशान करने के लिए कर सकते हैं। लोन न चुका पाने पर आपके रिश्तेदारों और दोस्तों को फोन करके दबाव बनाया जा सकता है।
पूजा अभिषेक सिंह भी ऐप की परमिशन ध्यान से देखने की सलाह देती हैं। कॉन्टैक्ट, फोटो और कॉल लॉग का एक्सेस देना जोखिम भरा हो सकता है। हालांकि KYC के दौरान कैमरे की जरूरत पड़ सकती है, लेकिन यह जरूर देखें कि कौन सी परमिशन किस काम के लिए मांगी जा रही है।
Also Read: F&O ट्रेडिंग से हुई कमाई? 31 अगस्त है ITR फाइलिंग की आखिरी तारीख, ऐसे निकाले टर्नओवर और भरे टैक्स
लोन लेते समय सिर्फ ब्याज दर देखना काफी नहीं है। प्रोसेसिंग फीस, प्लेटफॉर्म फीस और पेनल्टी जैसे दूसरे चार्ज भी लोन को महंगा कर सकते हैं। रोहित अरोड़ा की सलाह है कि ग्राहक हमेशा वार्षिक प्रतिशत दर (APR) के बारे में पूछें। इससे लोन की कुल लागत का सही अंदाजा लगाने में मदद मिलती है।
एक्सपर्ट बताते हैं कि अगर गलती से किसी फर्जी लोन ऐप के चक्कर में फंस गए हैं या पैसे का नुकसान हो गया है, तो घबराएं नहीं और तुरंत कार्रवाई करें। पूजा अभिषेक सिंह के मुताबिक, सबसे पहले अपने बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को इसकी जानकारी दें। इसके बाद नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर शिकायत दर्ज करें।
इसके अलावा ठगी से जुड़े सभी सबूत संभालकर रखें। इनमें लेनदेन की जानकारी, मैसेज के स्क्रीनशॉट और पेमेंट की रसीदें शामिल हैं। साथ ही ऐप की सभी परमिशन बंद करें, उसे फोन से अनइंस्टॉल करें और अपने बैंकिंग पासवर्ड बदल दें।
रोहित अरोड़ा कहते हैं कि फर्जी ऐप चलाने वाले लोग अक्सर पीड़ित के डर का फायदा उठाते हैं। इसलिए डर या शर्म की वजह से चुप न रहें। बैंक को जानकारी देने और साइबर पोर्टल पर शिकायत करने के साथ-साथ ऐप की रिपोर्ट गूगल प्ले स्टोर या ऐपल ऐप स्टोर पर भी करें। इससे ऐप को हटाने में मदद मिल सकती है और दूसरे लोग भी ठगी से बच सकते हैं।