facebookmetapixel
Advertisement
Stocks To Watch Today: Aurobindo, ACME Solar से लेकर Ola Electric तक, शेयर बाजार में आज फोकस में रहेंगे ये स्टॉक्ससुप्रीम कोर्ट का प्रस्ताव: अदालतों में होगा AI का इस्तेमाल, लेकिन सीमाओं के साथ तीन दिन देरी से केरल पहुंचा मॉनसून, अल नीनो के असर से कमजोर वर्षा की आशंका बढ़ीपश्चिम एशिया संकट के बीच ईरान से 2,557 लोग सुरक्षित निकाले गए: विदेश मंत्रालयभारत-वेनेजुएला ऊर्जा साझेदारी मजबूत करने की दिशा में कदम, तेल सप्लाई और खनिज सहयोग पर बढ़ी बातचीतEditorial: क्रेडिट स्कोर से परे, भारत के खुदरा ऋण बाजार में बड़ा बदलावMSMEs की महत्वाकांक्षाओं को न दबाएं: मानकों से समझौता किए बिना अनुपालन को सरल बनाना जरूरीभारत का तेल व्यापार घाटा: मांग पर नियंत्रण और खपत में संतुलन की जरूरतभारत के IPO बाजार में विदेशी कंपनियों की लिस्टिंग से बढ़ा OFS का दबदबा, अरबों डॉलर बाहर जाने का रुझानखुदरा निवेश तंत्र को और व्यापक बनाएंगे छोटे-मझोले शहर: ऐंजल वन ग्रुप सीईओ अंबरीश केंगे

ग्रीष्मकालीन फसलों की बोआई में हल्की बढ़त, दलहन-मोटे अनाज में तेज उछाल

Advertisement

पिछले महीने तक इन फसलों की बोआई में कमी दर्ज की जा रही थी।

Last Updated- April 06, 2026 | 7:17 PM IST
Summer crop sowing
प्रतीकात्मक तस्वीर

Summer crop sowing: ग्रीष्मकालीन फसलों की बोआई अब सुधरने लगी है। पिछले महीने तक इन फसलों की बोआई में कमी दर्ज की जा रही थी। इस महीने इनके रकबा में वृद्धि देखने को मिल रही है। केंद्रीय कृषि व किसान कल्याण मंत्रालय के मुताबिक 3 अप्रैल तक ग्रीष्मकालीन फसलों की बोआई 58.29 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गई है। यह पिछले साल इसी अवधि के 57.80 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 0.48 लाख हेक्टेयर यानी 0.83 फीसदी अधिक है। कुल मिलाकर बोआई में हल्की बढ़त दिख रही है। लेकिन फसलों के भीतर रुझान अलग-अलग हैं जैसे धान का रकबा घटा है, जबकि दालें, मोटे अनाज और तिलहनों के रकबा में इजाफा हुआ है। ग्रीष्मकालीन फसलों की कुल बोआई अभी भी सामान्य क्षेत्रफल से पीछे है। इन फसलों का सामान्य रकबा 75.37 लाख हेक्टेयर है। पिछले वर्ष का अंतिम ग्रीष्मकालीन क्षेत्र 83.92 लाख हेक्टेयर था।

धान के रकबा में गिरावट

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस साल 3 अप्रैल तक धान का रकबा 30.12 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल इसी समय 32.59 लाख हेक्टेयर था। इस तरह धान के रकबा में 2.47 लाख हेक्टेयर यानी 7.58 फीसदी की कमी। यह संकेत देता है कि कुछ राज्यों में किसानों ने पानी की उपलब्धता और लाभकारी विकल्पों को देखते हुए फसल चयन बदला है।

Also Read: फर्टिलाइजर सप्लाई पर संकट? पश्चिम एशिया तनाव का असर अब खेतों तक, किसानों की बढ़ी चिंता और खर्च का बोझ

दलहन फसलों की बोआई में तेज बढ़त

सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस साल ग्रीष्मकालीन दलहन फसलों की बोआई में तेज बढ़त दर्ज की गई है। 3 अप्रैल तक दलहन का रकबा 8.79 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले साल 7.02 लाख हेक्टेयर था। इस तरह दलहन फसलों का रकबा करीब 25 फीसदी बढ़ गया। इस सीजन की सबसे बड़ी दलहन फसल मूंग का रकबा 24 फीसदी बढ़कर 6.09 लाख हेक्टेयर, जबकि उड़द का 25.39 फीसदी बढ़कर 2.42 लाख हेक्टेयर हो गया।

‘श्री अन्न’ व मोटे अनाज के रकबा में भी विस्तार

ग्रीष्मकालीन सीजन में 3 अप्रैल तक मोटे अनाज (श्री अन्न) का रकबा 11.64 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल 10.77 लाख हेक्टेयर से करीब 8 फीसदी ज्यादा है। बाजरा का रकबा करीब 24 फीसदी बढ़कर 3.91 लाख हेक्टेयर, मक्का का 2.4 फीसदी बढ़कर 7.18 लाख हेक्टेयर, जबकि ज्वार का करीब 22 फीसदी घटकर 0.32 लाख हेक्टेयर रह गया।

Also Read: अमूल का ऐतिहासिक कीर्तिमान: 1 लाख करोड़ रुपये के क्लब में शामिल हुआ देश का पसंदीदा डेयरी ब्रांड

तिलहनों के रकबा में भी बढ़त

इस गीष्मकालीन सीजन में तिलहन फसलों के रकबा में भी अब बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। 3 अप्रैल तक तिलहनों का कुल रकबा 7.74 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल के 7.42 लाख हेक्टेयर रकबा से 4.18 फीसदी अधिक है। मूंगफली का रकबा 9.29 फीसदी बढ़कर 4.59 लाख हेक्टेयर, सूरजमुखी का 8.33 फीसदी बढ़कर 0.38 लाख हेक्टेयर हो गया, जबकि तिल का रकबा 3.21 फीसदी घटकर 2.71 लाख हेक्टेयर रह गया।

Advertisement
First Published - April 6, 2026 | 7:17 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement