शुक्रवार को उतार-चढ़ाव भरे कारोबार के बाद अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 0.25 फीसदी कमजोर होकर बंद हुआ। डीलरों ने बताया कि पश्चिम एशिया में फिर से तनाव बढ़ने और संघर्ष-विराम को खतरे के बीच दिन भर स्थानीय मुद्रा पर दबाव बना रहा। बाजार के जानकारों ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक ने विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करते हुए डॉलर की बिक्री की और इस तरह उसने घरेलू मुद्रा को और अधिक कमजोर होने से बचाया।
दिन के दौरान रुपया गिरकर 94.68 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। लेकिन बाद में कुछ नुकसान की भरपाई करते हुए 94.48 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। एक दिन पहले यह 94.25 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। एक सरकारी बैंक के डीलर ने कहा, युद्ध विराम उल्लंघन की खबरें थीं, जिसके कारण बाजार की शुरुआत पिछले दिन के बंद स्तर से बड़े अंतर के साथ हुई। उन्होंने कहा, बाद में हालात स्थिर हो गए और आरबीआई ने बाजार में उतार-चढ़ाव नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप किया।
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खबरों से पता चला है कि तकनीकी रूप से युद्धविराम लागू होने के बावजूद होर्मुज स्ट्रेट के आस-पास अमेरिका और ईरान के बीच फिर से झड़पें हुईं। ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिकी सेना ने एक ईरानी टैंकर, जहाजों और कुछ तटीय इलाकों को निशाना बनाया, जबकि अमेरिका ने ईरान पर आरोप लगाया कि उसने व्यापारिक जहाज़ों की सुरक्षा कर रहे अमेरिकी युद्धपोतों पर मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया।
खबरों के मुताबिक जवाब में अमेरिका ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन ठिकानों पर जवाबी हमले किए। जहां एक तरफ संघर्ष को भड़कने से रोकने के लिए पर्दे के पीछे कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, वहीं हाल के घटनाक्रमों ने एक बार फिर उजागर कर दिया है कि स्थिति कितनी नाजुक है।