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10 सालों में दोगुने से भी अधिक हुई भारत में पेट्रोल की खपत

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पेट्रोल की मांग आगे चलकर काफी कम हो सकती है क्योंकि सीएनजी, सीबीजी, इथेनॉल और ईवी जैसे पेट्रोल के विकल्प मिश्रण में भूमिका निभाना शुरू कर रहे हैं

Last Updated- April 10, 2024 | 12:16 PM IST
Petrol Diesel Excise Duty

देश में पेट्रोल की खपत तेजी से बढ़ रही है। जैसे-जैसे वाहनों की संख्या में बढ़त हो रही है देश कमें पेट्रोल की खपत भी बढ़ रही है। हाल ही में आई एक रिपोर्ट के हिसाब से पेट्रोल की खपत बीते 10 सालों में दोगुनी से भी अधिक हुई है।

वहीं डीजल की खपत लगभग एक तिहाई बढ़ गई है जबकि तेल की कुल मांग आधी हो गई है। आंकड़ों से पता चलता है कि ईवी (इलेक्ट्रिक वाहन) और रिन्यूएबल एनर्जी के लिए नीतिगत दबाव के बावजूद जीवाश्म ईंधन की मांग बनी हुई है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2013-14 और 2023-24 के बीच पेट्रोल की वार्षिक खपत 117%, डीजल की 31%, विमानन टरबाइन ईंधन की 50% और एलपीजी की 82% बढ़ी है।

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मिट्टी के तेल की खपत में 93 फीसदी की कमी

इस अवधि के दौरान मिट्टी के तेल की खपत में 93% की गिरावट आई है। एक दशक में पेट्रोल से चलने वाले वाहनों की प्राथमिकता भी बढ़ी है क्योंकि डीरेग्यूलेशन के बाद से डीजल वाहनों को पहले जैसी वरीयता नहीं मिल रही है।

डीजल वाहनों की घटती लोकप्रियता के पीछे एक कारण यह भी है कि पेट्रोल वाहनों को कम रखरखाव की आवश्यकता होती है, और अब ये ईवी हाइब्रिड वेरिएंट में उपलब्ध हैं।

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पेट्रोल की मांग आगे चलकर काफी कम हो सकती है क्योंकि सीएनजी, सीबीजी, इथेनॉल और ईवी जैसे पेट्रोल के विकल्प मिश्रण में भूमिका निभाना शुरू कर रहे हैं, खासकर दोपहिया और तिपहिया व्हीकल सेगमेंट में जबकि डीजल के विकल्प उस तरह से बाजार में मौजूद नहीं है।

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First Published - April 10, 2024 | 12:16 PM IST

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