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चाय की कीमत से संतुष्ट नहीं उद्योग

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Last Updated- December 07, 2022 | 12:44 AM IST

नीलामी केंद्रों पर चाय की औसत कीमत में तेजी का रुख बना हुआ है, लेकिन चाय उद्योग का मानना है कि बढ़ती लागत के मुकाबले चाय की कीमत में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है।


धनसेरी चाय के अध्यक्ष सी के धानुक ने बताया कि पिछले दस सालों के दौरान लागत दोगुने से ज्यादा हो गई है। उन्होंने कहा – उद्योग के लिए सामाजिक प्रतिबध्दता पूरी करना काफी मुश्किल हो रहा है। धानुक ने कहा – हालांकि चाय की कीमत में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन अगर लागत की बढ़ोतरी को देखें तो चाय के दाम और ज्यादा बढ़ने चाहिए थे।

इस बीच, इंडियन टी असोसिएशन (आईटीए) ने नीलामी केंद्रों पर चाय की कीमतों में अपर्याप्त वृध्दि पर चिंता जाहिर की है। आईटीए के सूत्रों ने कहा – हालांकि चाय को आवश्यक वस्तु नहीं माना जाता है, पर नीलामी केंद्रों पर कीमतों में वृध्दि को लेकर चिंता करने की कोई वजह भी नहीं है। इसकी वजह लागत के मुकाबले कीमत में वृध्दि नहीं होना है।

आईटीए के मुताबिक चालू वर्ष के दौरान नीलामी केंद्रों पर चाय की औसत कीमत वर्ष 1998 की कीमतों से नीचे है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 1998 में चाय की कीमतों में ऐतिहासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। समान नजरिया रखते हुए मैक्लिओड रसेल के निदेशक कमल बहेती ने कहा कि नीलामी के मूल्य इस वर्ष पिछले वर्ष की तुलना में निश्चित रुप से बेहतर हैं।

बहेती ने कहा – कम से कम हम खर्चों को कवर करते हुए लाभ-अलाभ की स्थिति का प्रबंधन कर रहे हैं। धानुक ने कहा कि उद्योग पिछले कई वर्षों से उद्योग कठिन दौर से गुजर रहा था। पिछले वर्ष नीलामी मूल्य 72 रुपये प्रति किलोग्राम तक कम हो गया।

इस वर्ष औसत नीलामी मूल्य लगभग 10 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ा है।पहली बार वर्ष 2008 में चाय का निर्यात 20.42 प्रतिशत बढ़ा है (पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में)। उत्पादन का स्तर समान बने रहने के अनुमान के साथ उद्योग को आशा है कि वर्ष 2008 शेयरधारकों के लिए खुशखबरी लेकर आएगा।

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First Published - May 20, 2008 | 11:12 PM IST

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