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गुजरात में लहलहाने लगी अंगूर की फसल

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Last Updated- December 07, 2022 | 2:02 AM IST

गुजरात में उगाए जाने वाले फलों और सब्जियों की फेहरिस्त  में अब एक और नाम जुड़ गया है अंगूर का।


तंबाकू और केले की खेती के लिए मशहूर मध्य गुजरात के किसानों के एक समूह ने यहां पिछले दो साल से अंगूरों की खेती करनी शुरू की है। वडोदरा जिले के सावली तहसील के 6 किसानों ने आज से कोई दो साल पहले अंगूर की खेती का प्रयोग शुरू किया।

और अच्छी बात यह रही कि इन किसानों को अंगूर की इस फसल से काफी अच्छा मुनाफा मिला। हालांकि इस रसदार फल की खेती बड़े पैमाने पर नहीं की गई थी। केवल 7 एकड़ की जमीन पर यह प्रयोग आरंभ हुआ और महज इतने क्षेत्रफल में ही इन्होंने कुल 30 टन अंगूर पैदा कर लिए। यानि एक एकड़ में 4.5 टन अंगूर का उत्पादन हुआ।

सावली के एक किसान मुकेश पटेल ने बताया कि पिछले साल अंगूर की सफलतापूर्वक खेती कर लेने के बाद अंगूर की खेती का यह उनका दूसरा साल है। उनके अनुसार, इस इलाके में पैदा हुए अंगूर की बाजार में काफी अच्छी मांग है। आसानी से इन्हें अच्छा घरेलू बाजार मिल जा रहा है। यहां उगाए गए अंगूर अहमदाबाद और वडोदरा के बाजारों में आसानी से बिक जा रहे हैं।

वडोदरा के भाजपा किसान मोर्चा के अध्यक्ष सतीश पटेल ने बताया कि अब तक मध्य गुजरात के किसान कपास, केला और तंबाकू का उत्पादन करते रहे हैं पर अब कुछ किसान अच्छे मुनाफे के लिए नए-नए फसलों को लगातार आजमा रहे हैं। जैसे कि अभी हाल ही में इस इलाके के किसानों ने पहली बार अंगूर की खेती को आजमाया है। मध्य गुजरात का हाल अब यह है कि इस क्षेत्र में अंगूर की खेती का दायरा धीमे-धीमे पर लगातार बढ़ता ही जा रहा है।

सावली से 65 किलोमीटर दूर पंचमहल जिले के गोधरा तहसील के एक किसान ने 17 एकड़ में अंगूर रोपा है। दक्षिणी गुजरात के देसाई फल और सब्जी ने योजना बनायी है कि वह कच्छ के मरुस्थलीय इलाके में अंगूरी उगाएगी। पर अंगूर उत्पादन करने के लिए शुरुआत में काफी निवेश की जरूरत होती है।

तकरीबन एक एकड़ में इसकी खेती करने के लिए 2 लाख रुपये लगाना होता है। इसके अलावे इन्हें अंगूर के पौधे को पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र से मंगााना पड़ता है। यही नहीं इसकी खेती के लिए प्रशिक्षित मजदूरों की भी जरूरत होती है, जिसकी इस इलाके में काफी किल्लत है।

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First Published - May 28, 2008 | 12:33 AM IST

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