मार्च 2026 में सोना और चांदी दोनों ने तेज दबाव झेला और कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली। भारत में सोना करीब 7 प्रतिशत टूटा, जबकि डॉलर के हिसाब से गिरावट और ज्यादा (11%) रही। चांदी भी इसी दबाव में रही। टाटा म्यूचुअल फंड की रिपोर्ट बताती है कि यह गिरावट अचानक नहीं आई, बल्कि कई बड़े कारण एक साथ सामने आए, जिन्होंने बाजार की दिशा बदल दी।
इस बार सोना और चांदी दोनों ही ऐसे दौर से गुजरे, जहां बाजार के हर हिस्से में बिकवाली दिखी। इक्विटी, बॉन्ड और करेंसी बाजार में गिरावट आई तो निवेशकों ने नुकसान की भरपाई के लिए सोना और चांदी भी बेच दी। मजबूत डॉलर और बढ़ती बॉन्ड यील्ड ने इन धातुओं की मांग को कमजोर किया, क्योंकि निवेशक अब ऐसे विकल्पों की ओर बढ़े जो रिटर्न देते हैं। इसके साथ ही गोल्ड ETF से भी भारी निकासी हुई और हेज फंड्स ने अपनी हिस्सेदारी घटा दी, जिससे दबाव और बढ़ गया।
आमतौर पर युद्ध या तनाव के समय सोना और चांदी को सहारा मिलता है, लेकिन इस बार तस्वीर अलग रही। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच तनाव ने ऊर्जा कीमतों को बढ़ा दिया, जिससे कई देशों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ा। कुछ देशों को अपनी मुद्रा बचाने के लिए सोना बेचना पड़ा। केंद्रीय बैंकों की खरीद में भी धीमापन आया। यानी जो फैक्टर आमतौर पर कीमतों को ऊपर ले जाते हैं, वही इस बार उल्टा असर डालते दिखे।
इस गिरावट में एक बड़ा बदलाव यह देखने को मिला कि सोना सुरक्षित ठिकाने से हटकर लिक्विडिटी का साधन बन गया। जब बाजार में नकदी की जरूरत बढ़ी, तो निवेशकों ने सबसे पहले सोना और चांदी बेची। यह एक क्लासिक साइकल जैसा है, जहां शुरुआती निवेशक टिके रहते हैं, लेकिन बाद में आए निवेशक तेजी से बाहर निकल जाते हैं और कीमतें स्थिर होने लगती हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले समय में सोने की कीमतें एक सीमित दायरे में रह सकती हैं और करीब 5 प्रतिशत तक ऊपर-नीचे हो सकती हैं। बाजार अभी भी डॉलर, ब्याज दरों और वैश्विक हालात के बीच उलझा हुआ है, इसलिए साफ ट्रेंड बनने में समय लग सकता है।
हाल की गिरावट के बावजूद कुछ बड़े कारण अब भी बने हुए हैं जो लंबे समय में इन दोनों कीमती धातुओं से बेहतर रिटर्न की उम्मीद बंधवा रहे हैं। दुनिया में बढ़ता कर्ज, महंगाई का दबाव, कागजी मुद्रा पर भरोसे में कमी और लगातार बने जियोपॉलिटिकल तनाव ऐसे फैक्टर हैं, जो समय के साथ सोने और चांदी की मांग को बनाए रखते हैं। सरकारें कर्ज से निपटने के लिए महंगाई, मुद्रा कमजोर करने और वित्तीय दबाव जैसे रास्ते अपनाती हैं, और ऐसे माहौल में सोना और चांदी को फायदा मिलता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के समय में गोल्ड-सिल्वर रेशियो में तेजी आई है और यह 62 के ऊपर चला गया है। इसका मतलब है कि सोना चांदी के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन करता दिख रहा है। आगे यह रेशियो 68 के आसपास जा सकता है, जो यह संकेत देता है कि मौजूदा हालात में सोने की मांग चांदी के मुकाबले ज्यादा मजबूत बनी रह सकती है।
चांदी की कहानी थोड़ी अलग है। यह सिर्फ निवेश का साधन नहीं है, बल्कि इंडस्ट्रियल मेटल भी है। वैश्विक आर्थिक सुस्ती, सोलर इंस्टॉलेशन में कमी और इंडस्ट्रियल मांग में गिरावट ने चांदी की कीमतों पर दबाव डाला है। इसके अलावा निवेशकों ने भी चांदी में अपनी पोजिशन कम की, जिससे गिरावट और तेज हो गई।
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चांदी में उतार-चढ़ाव ज्यादा देखने को मिल सकता है, क्योंकि इसकी कीमतें सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि इंडस्ट्रियल गतिविधियों पर भी निर्भर करती हैं। हालांकि, ग्रीन एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य सेक्टर्स में इसकी जरूरत बनी रहती है, जो समय के साथ इसकी मांग को सहारा देती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस समय सोना और चांदी में एक बार में निवेश करने के बजाय धीरे-धीरे निवेश करना बेहतर माना जा रहा है। बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, इसलिए निवेशकों को सतर्क रहते हुए चरणबद्ध तरीके से निवेश करने की सलाह दी गई है।