सोने की कीमतें गुरुवार को सात हफ्ते के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई और लगातार चौथे दिन इनमें इजाफा हुआ। होर्मुज स्ट्रेट फिर से खुलने की उम्मीदों ने महंगाई और लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों को लेकर बढ़ रही चिंताओं को कम कर दिया। इस कारण सोने के भावों में इजाफा हुआ।
हाजिर सोना 0.4 फीसदी बढ़कर 4,261.86 डॉलर प्रति औंस पर जा पहुंचा। इससे पहले यह 18 जून के बाद के अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया था। बुधवार को सोने में फरवरी के बाद की सबसे बड़ी एकदिवसीय बढ़त दर्ज की गई थी और इसकी कीमत 4,267.24 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई थी। अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 0.4 फीसदी की बढ़त के साथ 4,321.40 डॉलर पर पहुंच गया।
जेफ़रीज की कंपनी ट्रेडू डॉट कॉम के वरिष्ठ बाजार विश्लेषक निकोस जाबोरस ने कहा, होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ती उम्मीदों के बीच सोना आज अपनी हाल की बढ़त बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। कूटनीतिक समाधान से तेल की आपूर्ति फिर से शुरू होने की उम्मीदों के कारण महंगाई का डर घट रहा है और फेड के सख्त रुख की संभावनाओं पर भी लगाम लग रही है।
ईरान और ओमान के बीच प्रस्तावित डील से ईरान और अमेरिका के बीच पांच महीने से चल रहे युद्ध को खत्म करने में मदद मिल सकती है। रॉयटर्स को ईरान के एक वरिष्ठ सूत्र और इलाके के दो अधिकारियों ने बताया कि इस डील से तेहरान को होर्मुज स्ट्रेट से खाड़ी में आने वाले जहाजों पर नियंत्रण मिल जाएगा। सितंबर में अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की बाजार की उम्मीदें दो दिन पहले की 67 फीसदी से घटकर 55 फीसदी रह गई हैं।
आमतौर पर सोने को महंगाई से बचाव का ज़रिया माना जाता है, लेकिन ऊंची ब्याज दरों वाले माहौल में इससे कोई कमाई नहीं होती। इसलिए इसका आकर्षण कम हो जाता है। सैन फ्रांसिस्को के फेडरल रिजर्व बैंक की प्रेसिडेंट मैरी डेली ने कहा कि वह पिछले हफ्ते ब्याज दरों को स्थिर रखने के फैसले का पूरी तरह समर्थन करती हैं क्योंकि केंद्रीय बैंक और आंकड़े इकट्ठा कर रहा है कि महंगाई, जो उसके 2 फीसदी के लक्ष्य से काफी ज्यादा है, को लेकर वह क्या कदम उठाए ।
निवेशक शुक्रवार को आने वाली जुलाई की अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। एडीपी की नैशनल एम्प्लॉयमेंट रिपोर्ट से पता चला है कि जुलाई में अमेरिका में प्राइवेट पेरोल की वृद्धि धीमी हो गई। जाबोरस ने कहा, सोने पर फिर से दबाव पड़ने और 2026 के नए निचले स्तर पर जाने का खतरा बना हुआ है। कीमतों का दबाव बना हुआ है, जिससे ब्याज दरें बढ़ाने का विरोध करने वाले सक्रिय हैं और भूराजनीतिक जोखिम भी बने हुए हैं।