कपास की बढ़ती कीमतें और कम उत्पादन की संभावना ने कपड़ा उद्योग की चिंता बढ़ा दी है। वैश्विक हालात के चलते बढ़ती महंगाई कपड़ा उद्योग के लिए एक और चिंता का सबब बनी हुई है, ऐसे में इस साल कपास की बुआई का रकबा बढ़ने का अनुमान उद्योग के लिए खुशखबरी लेकर आया है। कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) के अनुसार 2026 में कपास की बुआई का रकबा सात फीसदी बढ़ सकता है।
पिछले दो महीनों के दौरान भारत में कपास के भाव में 25 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया है। इस समय शंकर (31 mm) की कीमत 67,100 रुपये प्रति कैंडी (18,869 रुपये प्रति क्विंटल) चल रही है। ईरान अमेरिका युद्ध शुरू होने के पहले इसकी कीमत करीब 15,000 रुपये प्रति क्विंटल थी।
सीएआई का मानना है कि अच्छे दाम और एमएसपी में बढ़ोत्तरी के चलते किसान कपास की खेती बढ़ाने की तैयारी में हैं। मध्यम स्टेपल कपास का मूल्य 8,267 रुपये प्रति क्विंटल और लंबा स्टेपल कपास का मूल्य 8,667 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है। सरकार ने इन कपासों के दाम में 557 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है।
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सरकार के ताजा अनुमानों के अनुसार, इस सीजन में कपास का कुल उत्पादन 292 लाख गांठ रहने की उम्मीद है, जबकि घरेलू मांग 328 लाख गांठ तक पहुंच गई है। सीएआई का मानना है कि आने वाले 2026 के बुआई सीजन में देश में कपास की खेती का रकबा बढ़ सकता है। संघ ने अलग-अलग राज्यों से मिली जानकारी के आधार पर यह अनुमान लगाया गया है कि इस बार कपास का रकबा करीब 7 फीसदी तक बढ़ेगा। सीएआई फसल समिति के अनुसार किसानों को इस साल कपास की अच्छी कीमतें मिली हैं और उनकी आय भी बढ़ी है। इसी वजह से किसान अगले सीजन में ज्यादा रकबे में कपास बोने के लिए उत्साहित हैं।
सीएआई के ताजा अनुमान के मुताबिक 2025-26 सीजन में कपास का आयात 47 लाख गांठ रहने का अनुमान है। पिछले साल यह आयात 41 लाख गांठ था जबकि निर्यात 18 लाख गांठ पर स्थिर रहने की उम्मीद है। इस सीजन में कुल उत्पादन (फसल/प्रेसिंग) का अनुमान 334 लाख गांठ (एक गांठ – 170 किलोग्राम) लगाया गया है। देश में घरेलू खपत 338 लाख गांठ रहने का अनुमान है, जो 7.6% ज्यादा है। इस साल कपास का सरप्लस बढ़कर 103.59 लाख गांठ होने की संभावना है पिछले साल 78.59 लाख गांठ था। सीजन के अंत में क्लोजिंग स्टॉक 85.59 लाख गांठ रहने का अनुमान है। यह पिछले साल के 60.59 लाख गांठ से लगभग 41 फीसदी ज्यादा है।
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कीमतें बढ़ने के कारण यह अनुमान लगाया गया है, अनुमान की सच्चाई जानने के लिए संघ ने एक समिति बनाई है। सीएआई ने बताया कि देश में कपास की कुल खपत का सही आंकड़ा जानने के लिए एक स्वतंत्र एजेंसी से सर्वे कराया जाएगा। स्टॉक के आंकड़ों में फर्क होने के कारण 7 सदस्यों की समिति बनाई गई है, जो इन आंकड़ों का मिलान करेगी। उत्पादन, आयात और स्टॉक तीनों में बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे हैं, जिससे आने वाले सीजन में कपास बाजार में अच्छी गतिविधि रहने की उम्मीद है।
| साल | कपास रकबा (लाख हेक्टेयर) |
|---|---|
| 2019-2020 | 127.674 |
| 2020-2021 | 129.468 |
| 2021-2022 | 119.664 |
| 2022-2023 | 127.572 |
| 2023-2024 | 123.423 |
| 2024-2025 | 112.947 |
| 2025-26 | 114.82 |