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चार साल के रिकॉर्ड स्तर पर सोयाबीन! महंगा होने से भारतीय सोयामील का निर्यात आधा रहने का अनुमान

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कम उत्पादन से सोयाबीन की कीमतें चार साल के रिकॉर्ड स्तर पर हैं। महंगा होने के कारण भारतीय सोयामील का निर्यात आधा रहने और आयात बढ़ने का अनुमान है

Last Updated- May 26, 2026 | 6:54 PM IST
Soybean
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

कम उत्पादन के कारण घरेलू बाजार में सोयाबीन की कीमतें चार साल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी हैं। सोयाबीन की कीमतों में आए इस उछाल से सोयामील के दाम भी चार साल के उच्चतम स्तर पर हैं। घरेलू बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ने के कारण भारतीय सोयामील वैश्विक बाजार में दूसरे देशों की तुलना में काफी महंगा हो गया है। यही वजह है कि विदेशी खरीदार अब अन्य उत्पादक देशों की ओर रुख कर रहे हैं।

दूसरी ओर, भारतीय व्यापारियों के लिए अपनी पुरानी निर्यात प्रतिबद्धताओं (Export Commitments) को पूरा करना मुश्किल हो रहा है। मजबूरी में निर्यातकों ने सोयामील एक्सपोर्ट के सौदे (कॉन्ट्रैक्ट) रद्द करना शुरू कर दिया है।

सोयाबीन में 52% और सोयामील में 41% की भारी तेजी

सोयाबीन के उत्पादन में गिरावट के अनुमानों के चलते इस साल जनवरी से लेकर अब तक इसकी कीमतों में 52 फीसदी की तेजी आ चुकी है। इस समय घरेलू हाजिर बाजार में सोयाबीन की कीमत 7,315 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास चल रही है, जबकि जनवरी की शुरुआत में इसके दाम 4,815 रुपये प्रति क्विंटल थे।

सोयाबीन की आपूर्ति में आई भारी कमी के चलते घरेलू बाजार में सोयामील की कीमतें भी महज एक महीने में 41 फीसदी बढ़कर 66,000 रुपये प्रति मीट्रिक टन हो गई हैं, जो पिछले चार वर्षों का सबसे ऊपरी स्तर है।

सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) ने भारत के साल 2025-26 के सोयाबीन उत्पादन अनुमान को 14 फीसदी घटाकर 11.03 मिलियन टन कर दिया है। सरकारी दूसरे अग्रिम अनुमानों में भी उत्पादन पिछले साल की तुलना में 16.69 फीसदी कम, यानी 12.72 मिलियन टन रहने का अनुमान लगाया गया है। इसके साथ ही मंडियों में सोयाबीन की आवक 25 फीसदी से ज्यादा घटकर 39.92 लाख टन रह गई है, जबकि पिछला कैरीओवर स्टॉक (बचा हुआ स्टॉक) पिछले साल की तुलना में 48 फीसदी घटकर महज 4.66 लाख टन रहने की उम्मीद है।

सोयामील का निर्यात आधा से भी कम रहने का अनुमान

घरेलू बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ने के कारण भारतीय सोयामील वैश्विक बाजार में महंगा हो गया है, जिससे विदेशी खरीदार दक्षिण अमेरिकी देशों का रुख कर रहे हैं। इसका सीधा असर देश के सोयामील निर्यात पर पड़ना तय माना जा रहा है। भारत दुनिया के बड़े सोयामील निर्यातकों में गिना जाता है, लेकिन इस बार हालात बदलते नजर आ रहे हैं। सोयामील की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण भारत का निर्यात तेजी से घट सकता है।

उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि भारत का सोयामील निर्यात 2025-26 मार्केटिंग सीजन में घटकर करीब 9 लाख टन रह सकता है, जबकि पिछले साल यह लगभग 20.2 लाख टन था। यानी इस साल निर्यात आधा से भी कम रहने का अनुमान है, जो पिछले चार वर्षों का सबसे निचला स्तर होगा।

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निर्यात के ऑर्डर रद्द, अफ्रीका से आयात का सौदा

विशेषज्ञों के अनुसार, इस संकट की सबसे बड़ी वजह भारतीय सोयामील की ऊंची कीमतें हैं। भारतीय सोयामील जून शिपमेंट के लिए करीब 680 डॉलर प्रति टन (FOB रेट) पर ऑफर किया जा रहा है, जबकि ब्राजील और अर्जेंटीना जैसे दक्षिण अमेरिकी देशों का सोयामील करीब 430 डॉलर प्रति टन में ही उपलब्ध है। कीमतों में इतना बड़ा अंतर होने के कारण विदेशी खरीदार भारत से दूरी बना रहे हैं।

सोयामील (खली) पशुओं और पोल्ट्री के चारे में इस्तेमाल होने वाला एक मुख्य प्रोटीन स्रोत है, जो सोयाबीन से तेल निकालने के बाद बचता है।

वैश्विक बाजार में कीमतों के इस भारी अंतर के कारण भारतीय निर्यातकों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। यही वजह है कि व्यापारियों ने निर्यात ऑर्डर रद्द करना शुरू कर दिया है। व्यापारिक सूत्रों के अनुसार, भारतीय व्यापारियों ने साल 2021 के बाद पहली बार करीब 25,000 मीट्रिक टन सोयामील एक्सपोर्ट के कॉन्ट्रैक्ट रद्द किए हैं। इसके उलट, घरेलू मांग को पूरा करने के लिए अफ्रीकी देशों से 80,000 टन सोयाबीन इंपोर्ट करने का सौदा किया गया है। घरेलू कीमतों में भारी उछाल के कारण व्यापार का पूरा रुख ही बदल गया है।

सोयाबीन का आयात बढ़ा

कृषि उत्पादों की निर्यातक कंपनी ‘सूरज इम्पेक्स’ के संस्थापक विनोद जैन के मुताबिक, कीमतों में भारी बढ़ोतरी के कारण भारत को सोयामील के नए एक्सपोर्ट ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं, जिसके चलते व्यापारियों ने अफ्रीकी देशों से सोयाबीन का इंपोर्ट बढ़ा दिया है। जैन ने कहा कि सितंबर 2026 को समाप्त होने वाले तेल वर्ष में भारत का सोयाबीन आयात बढ़कर रिकॉर्ड 800,000 टन तक पहुंच सकता है।

सोपा (SOPA) द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल भारत ने लगभग 2,000 टन सोयाबीन का आयात किया था। वहीं ‘महाराष्ट्र ऑयल एक्सट्रैक्शंस’ के मुताबिक, भारतीय कीमतें वैश्विक बाजार से काफी ज्यादा हैं और तेल मिलों को नए निर्यात ऑर्डर तक नहीं मिल पा रहे हैं। दक्षिण अमेरिकी देशों की सप्लाई अधिक प्रतिस्पर्धी होने से खरीदार अब वहीं से माल उठा रहे हैं।

आगे भी निर्यात पर बना रहेगा दबाव

अगर घरेलू उत्पादन में सुधार नहीं हुआ और वैश्विक बाजार में कीमतों का यह अंतर बना रहा, तो भारत का सोयामील निर्यात लंबे समय तक दबाव में रह सकता है। इससे घरेलू बाजार में भी अस्थिरता बढ़ने की आशंका है। हालांकि, देश के पोल्ट्री उद्योग की मजबूत मांग फिलहाल कीमतों को सहारा दे रही है, लेकिन आने वाले महीनों में निर्यात और उत्पादन दोनों के आंकड़ों पर बाजार की पैनी नजर रहेगी।

केडिया एडवाइजरी की रिपोर्ट के मुताबिक, सोयाबीन मई 2022 के अपने ऊपरी स्तरों की तुलना में अब भी ऊंचे स्तर पर ट्रेड कर रहा है। आने वाले समय में कीमतों में सुधार (गिरावट) होने पर यह 7,000 से 6,780 रुपये की ओर आ सकता है, जबकि ऊपर में 7,800 रुपये पर मजबूत रेजिस्टेंस (प्रतिरोध) है।

वैश्विक स्तर पर देखें तो ब्राजील में रिकॉर्ड उत्पादन और अंतरराष्ट्रीय स्टॉक में बढ़ोतरी से आने वाले समय में कीमतों पर दबाव दिख सकता है। हालांकि, भारत में उत्पादन की कमी, पिछले बचे स्टॉक में गिरावट और बायोफ्यूल सेक्टर से आ रही खाद्य तेलों की मजबूत मांग घरेलू बाजार में किसी बड़ी गिरावट को रोके रखेगी।

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First Published - May 26, 2026 | 6:45 PM IST

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