पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर राज्य के किसानों पर न पड़े। युद्ध जैसी परिस्थितियों के बावजूद खाद की आपूर्ति बाधित न हो, इसके लिए सरकार ने योजना तैयार की है। खरीफ सीजन 2026 के लिए सुव्यवस्थित आपूर्ति श्रृंखला तैयार की गई है। सरकार ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि राज्य में किसानों को खाद की कमी नहीं होगी, इसके लिए खाद का बफर स्टॉक तैयार किया गया है।
कृषि निदेशक सुनिल बोरकर ने बताया कि खरीफ 2026 के लिए 48.80 लाख मीट्रिक टन उर्वरक आवंटित किए गए हैं, जिनमें से वर्तमान में लगभग 52 फीसदी उपलब्ध हैं। अप्रैल-मई में मांग कम रहने के कारण यह उपलब्धता बढ़कर सीजन की शुरुआत तक 55–60 फीसदी होने की संभावना है। उर्वरकों की आपूर्ति बनाए रखने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर योजना बनाई गई है तथा यूरिया और डीएपी का बफर स्टॉक रखा गया है।
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खरीफ सीजन 2026 को ध्यान में रखते हुए राज्य में किसानों को खाद की कमी न हो, इसके लिए सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। कोई भी कंपनी या विक्रेता किसानों को खाद के साथ अन्य उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। यदि ऐसा पाया गया, तो संबंधित कंपनियों और विक्रेताओं के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। खाद उत्पादक कंपनियां तालुका स्तर पर कृषि अधिकारियों से समन्वय कर आपूर्ति की योजना बनाएं और उसी के अनुसार वितरण सुनिश्चित करें। अधिकृत खाद्य विक्रेता केवल उसी जिले में खाद बेच सकेंगे, जिसके लिए उन्हें आवंटन मिला है। जिन विक्रेताओं के पास पहले से 20 मीट्रिक टन या उससे अधिक खाद का स्टॉक मौजूद है, उन्हें नया स्टॉक नहीं दिया जाएगा। खाद की बिक्री पॉस मशीन के माध्यम से रियल-टाइम में करना अनिवार्य किया गया है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
संभावित वैश्विक या युद्ध जैसी परिस्थितियों के बावजूद खाद की आपूर्ति बाधित न हो, इसके लिए सरकार सतर्क है। साथ ही रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करने के लिए नैनो खाद, जैविक खाद और हरी खाद के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के अनुसार ही खाद का उपयोग करें। इसके अलावा बीज उपचार के लिए राइजोबियम, एजोटोबैक्टर और पीएसबी जैसे जैविक उर्वरकों के उपयोग को बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
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ड्रोन के जरिए नैनो खाद के छिड़काव को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे लागत कम और उत्पादन बेहतर होगा। खाद की बिक्री और वितरण खाद नियंत्रण आदेश 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत नियंत्रित है। किसी भी तरह की अनियमितता पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि राज्य में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देते हुए 1.81 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को इसके अंतर्गत लाया जाए, जिससे किसानों की लागत घटे और जमीन की उर्वरता में सुधार हो।