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ब्रेंट क्रूड में उछाल, कीमतें 110 डॉलर के पार; ईरान के जवाबी हमलों से बढ़ी चिंता

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वैश्विक तेल कीमतों में तेज वृद्धि के बावजूद भारत की तेल मार्केटिंग कंपनियों ने खुदरा ईंधन की कीमतों को अब तक कोई बदलाव नहीं किया है

Last Updated- March 19, 2026 | 11:01 PM IST
Crude Oil Prices
फोटो: एआई जनरेटेड

अपने साउथ पार्स गैस क्षेत्र पर हमलों के बाद ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में प्रमुख ऊर्जा केंद्रों पर जवाबी हमले शुरू कर दिए जिससे कच्चे तेल का दाम आज 115 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ गया।

ईरान के घरेलू ऊर्जा के सबसे बड़े स्रोत साउथ पार्स गैस क्षेत्र पर इजरायल का हमला युद्ध को बढ़ाने का संकेत था और इसने वैश्विक बाजार में आपूर्ति में व्यवधान की चिंता पैदा कर दीं। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने कतर के रास लफान गैस संयंत्र और सऊदी अरब, कुवैत तथा संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में तेल रिफाइनरियों और गैस के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया।

युद्ध से पहले बेंचमार्क क्रूड करीब 74 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था जो आज 110 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। वैश्विक तेल कीमतों में तेज वृद्धि के बावजूद भारत की तेल मार्केटिंग कंपनियों ने खुदरा ईंधन की कीमतों को अब तक कोई बदलाव नहीं किया है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि भारत की शीर्ष प्राथमिकता घरेलू उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना है और देश मौजूदा स्थिति के आधार पर अपनी निर्यात नीति की समीक्षा करेगा। भारत फिलहाल यूरोप और बांग्लादेश व भूटान जैसे कुछ पड़ोसी देशों को परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करता है।

इधर, सरकार ने देश की तेल और गैस कंपनियों को उत्पादन, आयात, निर्यात, स्टॉक स्तर और खपत पैटर्न का विवरण साझा करने का निर्देश दिया है। सरकारी अधिसूचना के अनुसार सरकार के पेट्रोलियम नियोजन एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) को साझा किए जाने वाले इन आंकड़ों से पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस आपूर्ति श्रृंखला की प्रभावी निगरानी होगी और ​स्थिति का सही विश्लेषण हो सकेगा।

पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण भारत के लिए ऊर्जा संकट पैदा हो गया है क्योंकि देश अपनी ईंधन जरूरतों के लिए इस क्षेत्र पर बहुत अधिक निर्भर है। होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से खाड़ी से आपूर्ति बाधित हुई है। पश्चिम एशिया से एलपीजी आपूर्ति पर अपनी भारी निर्भरता के कारण भारत को एलपीजी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि दूसरे स्रोतों ने कुछ हद तक कच्चे तेल और एलएनजी की आपूर्ति सुरक्षित करने में देश की मदद की है।

समुद्री इंटेलिजेंस फर्म कैप्लर के आंकड़ों के अनुसार भारत ने रसोई गैस की आपूर्ति सुरक्षित करने के लिए अमेरिका से एलपीजी की खरीद बढ़ा दी है और वहां से लगभग 3.5 लाख टन एलपीजी लदे 13 टैंकर भारत आ रहे हैं।

इनमें से 91,183 टन क्षमता वाले 4 टैंकर अगले सप्ताह भारत पहुंच सकते हैं जबकि 93,180 टन वाले 4 अन्य टैंकर के अप्रैल की शुरुआत में पहुंचने की संभावना है। शेष 5 जहाज, जिनमें लगभग 1,66,000 टन गैस लदा है, उनके अप्रैल के मध्य और अंत के बीच पहुंचने की उम्मीद है।

भारत ने पहली बार अर्जेंटीना से भी एक एलपीजी कार्गो बुक किया है जिसकी 19,486 टन की खेप मार्च के अंत तक पहुंचने की उम्मीद है।

चल रहे संघर्ष के कारण पश्चिम एशिया से एलपीजी की आपूर्ति में तेज गिरावट आई है, जिसमें वहां से केवल 11 टैंकर 1,92,734 टन माल लेकर वर्तमान में भारत की ओर बढ़ रहे हैं। इनमें से अधिकांश खेप संघर्ष शुरू होने से पहले ही रवाना हुए थे।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार होर्मुज में फंसे भारत आने वाले टैंकरों में से दो एलपीजी टैंकर और एक कच्चे तेल का कार्गो भारत पहुंच गया है।

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First Published - March 19, 2026 | 10:59 PM IST

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