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बढ़ते घाटे के कारण विमान उद्योग की उड़ान ‘रद्द’

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Last Updated- December 07, 2022 | 5:42 AM IST

बढ़ती प्रतिस्पर्धा, यात्रियों की घटती संख्या और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की बढ़ती कीमत की वजह से इस साल एविएशन उद्योग को तकरीबन 60 अरब रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है।


इसकी वजह से एयरलाइंस अपने बेड़े में नए विमानों को शामिल करने की योजना पर फिलहाल ब्रेक लगाने का मन बना रही हैं या फिर उसे रद्द करने की तैयारी कर रही हैं। इसके साथ ही वे दूसरी विमानन कंपनियों को लीज पर विमान देने की योजना बना रहे हैं।

विजय माल्या प्रवर्तक किंगफिशर एयरलाइंस के बेड़े में इस साल 28 विमान शामिल होने थे, लेकिन अब इसमें कटौती करने या फिर इसे भविष्य के लिए टालने की योजना बनाई जा रही है। किंगफिशर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए इस साल बड़े विमान को तो खरीदेगी, लेकिन छोटे आकार के विमानों के ऑर्डर को संशोधित कर उसमें कटौती कर सकती है।

किंगफिशर के उपाध्यक्ष हितेश पटेल ने फ्रांस से बिजनेस स्टैंडर्ड को फोन पर बताया कि कंपनी बड़े आकार वाली ए 340 विमान को अपने बेड़े में शामिल कर रही है, लेकिन छोटे आकार के विमानों के लिए एयरबस के साथ हम अपने पहले के ऑर्डर की समीक्षा कर रहे हैं।

कई अन्य एयरलाइंस अपने घरेलू उड़ानों की संख्या में कटौती कर अपने विमानों को पश्चिम एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और यूरोपीय एयरलांइस कंपनियों को लीज पर देने की योजना बना रही है।

स्पाइस जेट की इस साल अपने बेड़े में दस एयरक्रॉफ्ट शामिल करने की योजना है। लेकिन घटते मुनाफे को देखते हुए कंपनी ऑर्डर को रद्द करने या उसे घटाने की बजाए विमानों को लीज पर देने की तैयारी कर रही है।

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First Published - June 14, 2008 | 12:02 AM IST

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