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Budget 2026: वैश्विक सेवा निर्यात में 10% हिस्सेदारी का लक्ष्य, सर्विस सेक्टर को मिली पहली प्राथमिकता

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टेक्नॉलजी प्रोफेशनल्स और इंजीनियरों को एआई और उभरती टेक्नॉलजी में अपस्किलिंग और रीस्किलिंग देना फोकस का एक और मुख्य क्षेत्र होगा

Last Updated- February 01, 2026 | 11:04 PM IST
Service Sector
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

साल 2047 तक वैश्विक सेवा निर्यात में 10 फीसदी हिस्सेदारी हासिल करने के मकसद से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सेवा क्षेत्र पर नए सिरे से जोर दिया है और इसे सरकार की वृद्धि की रणनीति में सबसे आगे रखा है।

रविवार को बजट भाषण में सीतारमण ने शिक्षा, रोज़गार और एंटरप्राइज पर एक उच्चाधिकार वाली स्थायी समिति बनाने की घोषणा की। इस समिति का काम भविष्य के ऐसे क्षेत्रों की पहचान करना होगा, जहां अर्थव्यवस्था में वृद्धि और रोजगार पैदा हो सकें। इसमें आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) के मुख्य आधार बनने की उम्मीद है। समिति को वैश्विक बदलावों से आगे रहने के लिए उपायों की सिफारिशें देनी होंगी। बजट में सेवाओं को दी गई अहमियत से जाहिर होता है कि सरकार मानती है कि भारत की बढ़ती युवा कार्यशक्ति के रोजगारों के लिए सिर्फ़ विनिर्माण ही काफ़ी नहीं होगी।

प्रस्तावित समिति से उम्मीद है कि वह मंत्रालय के स्तर पर पर बड़े पैमाने पर काम करेगी। बजट में बताए गए शुरुआती नियमों के अनुसार, यह क्षेत्र विशेष की कमियों के साथ-साथ क्रॉस-सेक्टोरल पॉलिसी और नियामकीय चुनौतियों की पहचान करेगी। इसकी जिम्मेदारियों में मानक तय करना और मान्यता देना शामिल होगा। साथ ही वह सेवाओं में रोजगार की संभावनाएं बढ़ाने के उपायों की सिफारिशें भी करेगी।

यह समिति सेवाओं के निर्यात के अवसरों की भी टटोलेगी और एआई समेत उभरती हुई टेक्नॉलजी का नौकरियों और स्किल की जरूरतों पर पड़ने वाले असर का आकलन करेगी। यह स्कूल के स्तर से ही शिक्षा के पाठ्यक्रम में एआई को शामिल करने और टीचर ट्रेनिंग के लिए स्टेट काउंसिल ऑफ़ एजुकेशनल रिसर्च ऐंड ट्रेनिंग को अपग्रेड करने के लिए खास उपाय सुझाएगी।

टेक्नॉलजी प्रोफेशनल्स और इंजीनियरों को एआई और उभरती टेक्नॉलजी में अपस्किलिंग और रीस्किलिंग देना फोकस का एक और मुख्य क्षेत्र होगा।  समिति कामगारों, नौकरियों और ट्रेनिंग के मौकों के लिए एआई  सक्षम मेल के लिए भी सुझाव देगी। इसके विचार वाले अन्य क्षेत्रों में अनौपचारिक काम को ज्यादा स्पष्ट और सत्यापन योग्य बनाना, इसे भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार करना और विदेशी प्रतिभा को भारत में आकर्षित करने के तरीके खोजना शामिल हैं।

सीतारमण ने कहा कि ये उपाय विकसित भारत के मुख्य चालक के तौर पर सेवा क्षेत्र पर फोकस करेंगे। उन्होंने कहा, इससे हम सेवा क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी बनेंगे और 2047 तक हमारी वैश्विक हिस्सेदारी 10 फीसदी होगी।

उद्योग के दिग्गजों ने इस इरादे का स्वागत किया, लेकिन साथ ही कहा कि इसे लागू करना बहुत जरूरी है। एड-टेक फर्म एरूडिटस के सह संस्थापक और सीईओ अश्विन डमेरा ने कहा, सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसे कैसे लागू किया जाता है। अगर उद्योग को पाठ्यक्रम डिज़ाइन में सही तरीके से शामिल किया जाता है और संस्थानों को प्लेसमेंट के नतीजों के लिए जवाबदेह ठहराया जाता है, तो इससे रोजगार पाने की क्षमता में काफी सुधार हो सकता है और शिक्षा को वर्कफोर्स की ज़रूरतों के साथ जोड़ा जा सकता है।

बजट में भारतीय डेटा सेंटर इस्तेमाल करने वाले विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं के लिए 2047 तक टैक्स छूट का भी प्रस्ताव किया गया है। लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें होंगी, जैसे कि भारतीय रीसेलर्स के जरिये घरेलू ग्राहकों को सेवा देना। इसके अलावा, कराधान को आसान बनाने के लिए सॉफ्टवेयर, आईटी सक्षम सर्विसेज, नॉलेज प्रोसेस आउटसोर्सिंग और कॉन्ट्रैक्ट रिसर्च ऐंड डेवलपमेंट को एक ही आईटी सेवा श्रेणी में रखा जाएगा।

ब्रोकरेज फर्म डीबीएस के विश्लेषकों के मुताबिक सेफ हार्बर प्रावधान जारी रहने से अनुपालन में आसानी होगी और सेवा प्रदाताओं के लिए विवाद कम होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि गैर-निवासी विशेषज्ञों को वैश्विक आय पर छूट देने से भी इस सेक्टर को फायदा होगा।

कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, बजट में रोजगार पैदा करने और मानव संसाधन विकास पर जोर दिया गया है।

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First Published - February 1, 2026 | 10:56 PM IST

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