का नाम में बोसोन बोस के नाम से ही लिया गया है।
बोस के अध्ययन ने कण भौतिकी के अध्ययन का तरीका ही बदल दिया। हिग्स बोसॉन ही वह कण है जो कि सैद्धांतिक कारण है कि ब्रह्मांड में सभी पदार्थों का द्रव्यमान होता है।
हिग्स बोसॉन नाम ब्रिटिश वैग्यानिक पीटर हिग्स और बोस के नाम से लिया गया है। हिग्स ने बोस और अलबर्ट आइंस्टीन की ओर से किये गए कार्यों को आगे बढ़ाया जिससे आज की खोज संभव हो सकी।
गत वर्ष पीटीआई की ओर से जब सर्न का दौरा किया था उस समय सर्न के प्रवक्ता पाउलो गिउबेलिनो ने कहा था, भारत इस परियोजना का ऐतिहासिक जनक जैसा है।
सर्न से करीब दस भारीतय संस्थान जुडे़ हुए हैं। इसमें मुख्य रूप से अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, जम्मू विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर स्थित इंस्टीट्यूट आफ फिजिक्स, पंजाब विश्वविद्यालय, गुवाहाटी विश्वविद्यालय और राजस्थान तथा कोलकाता स्थित साहा इंस्टीट्यूट आफ न्यूक्लियर फिजिक्स, वैरिएबल एनर्जी साइक्लोट्रान सेंटर, बोस इंस्टीट्यूट और आईआईटी मुम्बई शामिल है।