केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने आज उन इलाकों में निजी खनन कंपनियों का कड़ा विरोध किया जो नक्सलवाद से प्रभावित हैं । उनका कहना था कि इससे माओवादियों को कंपनियों से धन उगाही में मदद मिलती है ।
वन एवं पर्यावरण मंत्री रमेश ने माओवाद प्रभावित इलाकों में निजी खनन कंपनियों का विरोध करते हुए कहा, मेरा मानना है कि सारंडा को 11 वर्षों बाद माओवाद नियंत्रण से मुक्त कराया गया, हमें निजी खनन की अनुमति नहीं देनी चाहिए ।
माओवादियों पर दोहरी बात करने का आरोप लगाते हुए रमेश ने कहा, वे यह कहते हुए आदिवासी लोगों को उकसाने की कोशिश करते हैं कि निजी खनन कंपनियां आएंगी और आपकी आजीविका खत्म कर देंगी लेकिन साथ ही माओवादी निजी कंपनियों का स्वागत करते हैं क्येांकि वे उगाही कर सकते हैं, लेवी लगा सकते हैं और कंपनियों से धन प्राप्त कर सकते हैं ।
उन्होंने कहा, मेरा स्पष्ट मानना है कि सारंडा में और उसके जैसे इलाकों में हमारी प्राथमिकता सड़क, रोजगार, आवास, उत्पादकता जैसी मूलभूत विकास सुविधाएं देना है... उत्पादकता बढ़ानी है ।
यह पूछने पर कि ओडिशा के एक हिस्से को सारंडा विकास योजना में शामिल नहीं किया गया तो रमेश ने कहा, केंद्र योजना में जंगल के इस हिस्से को शामिल करने पर विचार कर रहा है ।