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विस्थापितों के मसले पर उच्चतम न्यायालय ने केन्द्र और राज्यों से मांगा जवाब

PTI

- July,25 2013 7:53 PM IST

प्रधान न्यायाधीश पी सदाशिवम की अध्यक्षता वाली खंडपीठ इस मसले को लेकर गैर सरकारी संगठन स्वजन की जनहित याचिका पर सुनवाई के लिये तैयार हो गयी। न्यायालय ने इसके साथ ही जम्मू कश्मीर और दक्षिणी राज्यों के अलावा सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी किये।

जनहित याचिका में कहा गया है कि विस्थापित :असम से निष्कासन: कानून, 1950 की धारा 2 के स्पष्ट प्रावधान के बावजूद केन्द्र और असम सरकार ने विस्थापित व्यक्तियों की स्थिति में सुधार के लिये कोई कदम नहीं उठाया है। यह धारा आंतरिक अशांति के शिकार व्यक्तियों को निष्कासन से संरक्षण प्रदान करती है।

याचिका में कहा गया है कि 1965 और 1971 में भारत पाकिस्तान के बीच युद्ध के कारण विस्थापित हिन्दु अल्पसंख्यकों को और पाकिस्तान और बांग्लादेश से इसी तरह की परिस्थितियों से प्रभावित व्यक्तियों को नागरिकता :संशोधन: नियम, 2004 के तहत नागरिकता प्रदान करके उन्हें राजस्थान और गुजरात में बसाया गया था।

याचिका के अनुसार, 2004 और 2007 के बीच केन्द्र सरकार की एक प्रशासनिक कार्रवाई के तहत एक नयी प्रक्रिया तैयार की गयी। इसमें ऐसे व्यक्तियों को नागरिकता कानून 1955 के प्रावधानों के अंतर्गत भारत की नागरिकता प्रदान करने की व्यवस्था है।

इस संगठन का तर्क है कि इससे पहले भी तिब्बत, श्रीलंका, भूटान, अफ्गानिस्तान, म्यामां और बांग्लादेश से आये चकमा शरणार्थियों को अरूणाचल प्रदेश और त्रिपुरा में बसाया गया था। याचिका के अनुसार भारत सरकार ने विस्थापितों को नागरिकता या शरणार्थी का दर्जा देने के लिये हमेशा ही इस नीति का पालन किया है।

भाषा अनूप

नननन

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