facebookmetapixel
Advertisement
AI एक्सपो में दिखी भारत की तकनीकी ताकत, पीएम बोले भविष्य यहीं से तय होगाInfosys ने एआई कंपनी Anthropic से मिलाया हाथ, शेयर 3% उछला; डील से क्या फायदा होगा?AI Impact Summit 2026, Day 2: नीति और टेक्नोलॉजी पर चर्चा, जानें आज क्या कुछ होगा खासग्लोबल साउथ को अपने डाटा से खुद के AI मॉडल बनाने चाहिए: अमिताभ कांतClean Max Enviro IPO: अगले हफ्ते खुल रहा ₹3100 करोड़ का आईपीओ, प्राइस बैंड हुआ फाइनल; चेक करें सभी डिटेल्सAadhaar Card New Design: सिर्फ फोटो और QR कोड के साथ आएगा नया आधार? जानें पूरा अपडेटक्या बदल जाएगी ‘इंडस्ट्री’ की कानूनी परिभाषा? सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच करेगी समीक्षाGold-Silver Price Today: सोने में 1,000 से ज्यादा की गिरावट, चांदी भी लुढ़की; खरीदारी से पहले आज के रेटDefence stock: रॉकेट बना डिफेंस कंपनी का शेयर, 7% तक आई तेजी; रक्षा मंत्रालय से मिला ₹5,000 करोड़ का ऑर्डरNRI का भारत पर भरोसा बढ़ा, हेल्थ इंश्योरेंस खरीद में 126% की रिकॉर्ड छलांग

ग्लोबल साउथ को अपने डाटा से खुद के AI मॉडल बनाने चाहिए: अमिताभ कांत

Advertisement

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में अमिताभ कांत ने कहा- एआई बहुभाषी, सुलभ और जवाबदेह हो; गरीबों और ग्लोबल साउथ के हित में तकनीक का इस्तेमाल जरूरी

Last Updated- February 17, 2026 | 12:13 PM IST
Amitabh Kant
नीति आयोग के पूर्व CEO अमिताभ कांत मंगलवार को इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में एक पैनल डिस्कशन के दौरान बोलते हुए। (स्क्रीनग्रैब/इंडियाAI)

नीति आयोग के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत ने मंगलवार को कहा कि भारत और ग्लोबल साउथ के अन्य देशों को अपने स्थानीय डेटा के आधार पर खुद के एआई मॉडल बनाने चाहिए, ताकि नागरिकों के जीवन में बदलाव लाया जा सके।

नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान ‘एआई फॉर इंडिया’स नेक्स्ट बिलियन: इंटरजेनरेशनल इनसाइट्स फॉर इन्क्लूसिव एंड फ्यूचर-रेडी ग्रोथ’ सत्र में बोलते हुए कांत ने कहा कि एआई बहुभाषी, सुलभ, किफायती और जवाबदेह होना चाहिए।

एआई और असमानता का खतरा

कांत ने कहा कि एआई के तेजी से विकास और इस क्षेत्र में हो रहे बड़े निवेश से समाज में बड़ा बदलाव आ सकता है, लेकिन इससे असमानता भी बढ़ सकती है। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि क्या एआई गरीबी रेखा से नीचे रहने वाली आबादी तक पहुंच पाएगा? क्या इससे ग्लोबल साउथ के लोगों के जीवन में सुधार होगा? क्या इससे शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण के स्तर को बेहतर बनाया जा सकेगा?

कांत ने चेतावनी दी कि अगर एआई को गरीब लोगों के हित में डिजाइन नहीं किया गया, तो मौजूदा असमानताएं और बढ़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि एआई का इस्तेमाल शिक्षा और सीखने के नतीजों को बेहतर करने में किया जाना चाहिए। जो चीजें पहले संभव नहीं थीं, वे अब एआई की मदद से संभव हो रही हैं।

ग्लोबल साउथ को अपने LLM बनाने चाहिए

कांत ने कहा कि एआई सिस्टम को भाषाई विविधता को ध्यान में रखना चाहिए। अगर एआई बहुभाषी नहीं होगा, तो बड़ी आबादी इससे बाहर हो जाएगी। आज बड़े भाषा मॉडल (LLM) को ट्रेन करने में भारत और ग्लोबल साउथ के देशों का डेटा तेजी से इस्तेमाल हो रहा है। उनके मुताबिक, भारत अमेरिका से 33 प्रतिशत ज्यादा डेटा दे रहा है।

कांत ने कहा कि बड़ी टेक कंपनियां इस डेटा के आधार पर अपने बिजनेस मॉडल बना सकती हैं और बाद में महंगे उत्पाद बेच सकती हैं। इसलिए भारत और अन्य विकासशील देशों को अपने डेटा के आधार पर खुद के एआई मॉडल बनाने चाहिए, ताकि सभी को बराबरी से लाभ मिल सके।

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर से सीख

भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के अनुभव का जिक्र करते हुए कांत ने कहा कि खुले और आपस में जुड़े सिस्टम की वजह से भारत ने कई सालों की प्रगति बहुत कम समय में हासिल की।

उन्होंने बताया कि ओपन एपीआई और वैश्विक इंटरऑपरेबिलिटी की वजह से तेज पेमेंट, शेयर बाजार लेन-देन, बीमा और अंतिम व्यक्ति तक कर्ज पहुंचाने में नवाचार संभव हुआ। इसके बाद निजी क्षेत्र को नवाचार और प्रतिस्पर्धा की अनुमति दी गई।

कांत ने सुझाव दिया कि एआई के क्षेत्र में भी ऐसा ही मॉडल अपनाया जाए, जहां डिजिटल पहचान की एक मजबूत आधारशिला हो और उसके ऊपर निजी क्षेत्र नए समाधान तैयार करे।

उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे एआई का उपयोग बढ़ रहा है, यह जरूरी है कि इसका इस्तेमाल ग्लोबल साउथ के लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए हो, ताकि विकास सबके लिए हो, न कि कुछ लोगों तक सीमित।

Advertisement
First Published - February 17, 2026 | 12:13 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement