विशेष सीबीआई न्यायाधीश अनुपम श्रीवास्तव ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद गुर्जर की जमानत याचिका निरस्त कर दी।
अदालत ने अपने आदेश में कहा, मामले में अभियोजन के गवाहों के बयान दर्ज किये जा चुके हैं। फरियादी के निवेेदन पर महज दो..तीन साक्षियों को बुलाया गया है। इनकी गवाही दर्ज होने और प्रकरण के निराकरण में देरी की संभावना नहीं है। इस स्थिति में साक्ष्य का मूल्यांकन करते हुए या साक्ष्य पर विचार करते हुए आरोपी को जमानत का लाभ दिया जाना उचित प्रतीत नहीं होता है।
बचाव पक्ष की ओर से खास तौर पर यह कहते हुए गुर्जर को जमानत पर रिहा करने की गुहार की गयी थी कि अभियोजन के ज्यादातर गवाहों ने अदालत में विरोधाभासी बयान दिये हैं और आरोपी पर लगाये गये इल्जाम इन कथनों से साबित नहीं हो रहे हैं।
इससे पहले, विशेष सीबीआई अदालत ने मामले के गुण..दोषों के आधार पर गुर्जर की जमानत अर्जी 25 जून को खारिज कर दी थी।