न्यायमूर्ति ए एम थिपसे ने नूरिया की जमानत याचिका पर सुनवाई की तारीख तीन दिसंबर मुकर्रर की।
गौरतलब है कि एक विशेष नारकोटिक्स अदालत ने 30 वर्षीय प्रवासी भारतीय नूरिया को गैर इरादतन हत्या के लिए एक नवंबर को सजा सुनाई थी, हालांकि उन्हें मादक पदार्थ के सेवन के आरोप से मुक्त कर दिया गया था।
नूरिया की ओर से दायर जमानत याचिका में उनके वकील आबाद पोंडा ने इस मामले की तुलना दिल्ली में जनवरी 1999 के संजीव नंदा मामले से की। नंदा ने नशे की हालत में बीएमडब्ल्यू कार से छह लोगों को कुचल दिया था और ये सभी लोग मारे गए थे।
याचिका में कहा गया था कि इस साल उच्चतम न्यायालय ने नंदा की सजा पांच साल से कम कर उन्हें दो साल सामुदायिक सेवा की सजा सुनाई।
अभियोजन पक्ष के अनुसार भारतीय मूल की अमेरिकी नागरिक नूरिया ने 30 जनवरी 2010 की तड़के दक्षिण मुंबई के मरीन ड्राइव स्थित एक पुलिस नाकेबंदी में अपनी गाड़ी घुसेड़ दी थी। इससे अफजल अकबर नाम के एक बाइक सवार और यातायात पुलिसकर्मी दीनानाथ शिंदे की मौत हो गई थी।
भाषा