सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने यहां संवाददाताओं से कहा कि पूर्व डीजी आरपी सिंह द्वारा उठाया गया मुद्दा बहुत प्रासंगिक है। यह सबसे महत्वपूर्ण है कि मई 2010 में जब मसौदा रिपोर्ट तैयार की गई तो नुकसान 2645 करोड़ रूपये आंका गया लेकिन नवंबर 2010 में जब रिपोर्ट संसद में पेश की गई तब यह नुकसान की राशि 1 . 76 लाख करोड़ रूपये पहुंच गई। यह अंतर कैसे आया?
तिवारी ने सवाल किया कि नुकसान के इस अनुमानित आंकड़ा बढने के लिए जिम्मेदार कौन है। उन्होंने कहा कि कैग को इस मुद्दे पर गौर करना चाहिए।
गौरतलब है कि कैग के पूर्व आडिटर आर पी सिंह ने टू जी स्पेक्ट्रम के आवंटन से सरकारी खजाने को 1.76 लाख करोड़ रूपये के अनुमानित नुकसान होने के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक :कैग: के आकलन से असहमति जतायी थी और लोक लेखा समिति के अध्यक्ष एम एम जोशी की भूमिका पर सवाल भी उठाया था।
सिंह ने आडिट दिशानिर्देशों के उल्लंघन का भी आरोप लगाया।