अपनी बेहतरीन अदाकारी से दर्शकों को गुदगुदा जाने वाले अभिनेता विजय राज ने फिल्म क्या दिल्ली क्या लाहौर में कैमरे के सामने रहने की बजाय उसके पीछे रहने का फैसला लिया। विभाजन पर बन रही इस फिल्म के जरिए विजय युद्ध और शांति के सवालों को उठाते हैं।
विजय को मीरा नायर की मानसून वेडिंग, रघु रोमियो और डैली बैली में उनके यादगार किरदारों के लिए पहचाना जाता है। विजय का मानना है कि निर्देशन में कदम रखने के लिए यह फिल्म बहुत बढि़या है।
प्रेस ट्रस्ट के साथ बातचीत में विजय ने बताया, मेरे लिए यह काफी भावनात्मक फिल्म है क्योंकि मैं एक बने बनाए ढर्रे से नहीं आता। मैं इस कहानी को अपने तरीके से कहना चाहता था। इस फिल्म को व्यवसायिक रूप से सफल बनाने के लिए मैंने इसमें आइटम गाने नहीं भरे हैं। यह एक सरल कहानी है।
1948 पर आधारित इस फिल्म में गुलजार साहब के कुछ बेहतरीन गाने हैं। इस फिल्म में कहानी कहने वाले भी गुलजार ही हैं।