दिल्ली उच्च न्यायालय ने आज यह कहते हुए कि बीआरटी की अवधारणा और उसका स्वरूप बुरा नहीं है, दिल्ली सरकार से कल तक यह बताने को कहा कि क्या अंबेडकर नगर-मूलचंद बस रैपिड ट्रांजिट कोरिडोर को कुछ बदलाव के साथ जारी रखा जा सकता है।
बीआरटी कोरिडोर की आलोचना करने वाली केन्द्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान की सर्वे रिपोर्ट का अध्ययन करते हुए न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराजोग और न्यायमूर्ति मनमोहन सिंह की खंड पीठ ने कहा, हमें बीआरटी बचाने के लिए समस्याएं दूर करने का तरीका ढूंढने दीजिए।
पीठ ने कहा, ख्याल बुरा नहीं है और डिजाइन में भी कोई खामी नहीं है, लेकिन बीचोंबीच एकाएक यातायात बढ़ जाने से पूरी परियोजना बदनाम हो गई है।
संस्थान के एक वरिष्ठ अधिकारी, जिन्होंने रिपोर्ट तैयार करने वाले दल का नेतृत्व किया, ने पीठ को बीआरटी के परीक्षण के दौरान विशेषग्य संगठन द्वारा अपनाए गए तरीके की जानकारी दी।
पूरे विवरण का अध्ययन करने के बाद पीठ ने चार घंटे से अधिक समय तक अंतिम बहस सुनी और कहा, समस्या शेख सराय से चिराग दिल्ली के बीच के इलाके में है, जो 5.8 किलोमीटर के पूरे स्ट्रेच का मात्र 800 मीटर है।
पीठ ने कहा कि साकेत की तरफ से बीआरटी की तरफ आने वाले वाहन शेख सराय और चिराग दिल्ली से बीआरटी कोरिडोर में आते हैं, कारें और बसें विभिन्न मार्गों की तरफ मुड़ जाती हैं।
पीठ ने सरकार से यह पता लगाने को कहा कि क्या बस नंबर 534 और 534 ए और कुछ चार्टर्ड बसों का मार्ग बदलकर कोरिडोर पर होने वाली वाहनों की भीड़ को कम किया जा सकता है।
भाषा