पाकिस्तान की एक अदालत ने वकीलों द्वारा शीर्ष न्यायालयों के न्यायाधीशों को माई लॉर्ड और योर लॉर्डशिप कहकर बुलाने को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा है ।
मलिक अल्लाह यार खान द्वारा दायर याचिका की सुनवायी लाहौर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश नासिर सईद शेख ने की ।
खान ने अपनी याचिका में कहा था कि किसी को माई लॉर्ड कहकर बुलाना अपराध है क्योंकि इस तरह से सिर्फ अल्लाह को संबोधित किया जा सकता है ।
खान ने यह भी कहा है कि 1980 के दशक में तत्कालीन राष्ट्रपति ने एक आदेश जारी कर अदालत में माई लॉर्ड जैसे संबोधनों से बचने और न्यायाधीशों को संबोधित करने के लिए सर, जनाब-ए-वाला और जनाब-ए-आली आदि का उपयोग करने की सलाह दी थी ।
राष्ट्रपति का यह आदेश जून 1979 में हुई बैठक में लिया गया था जिसमें शीर्ष न्यायालयोंं के मुख्य न्यायाधीश शामिल थे ।
खान ने अदालत से इस मामले में आदेश या निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है ।